पुलिस अफसरों के आदेश की अवहेलना पर वरिष्ठ लिपिक का चार्ज छीन लिया गया है। उनके स्थान पर सहायक लिपिक को चार्ज दिया गया है।
कानपुर के गांव कपूरपुर निवासी सिपाही नरेश सिंह यादव का बिना ड्यूटी के साढ़े तीन वर्ष तक वेतन निकलता रहा था। 13 दिसंबर को उसकी बीमारी से मौत के बाद मामला खुला।
आईजी जोन के आदेश पर एएसपी त्रिभुवन सिंह ने जांच कर रिपोर्ट एसपी डॉ. अनिल मिश्रा को दी। एसपी ने तत्कालीन गणना मोहर्रिर कोमल सिंह, कैश पटल के प्रभारी अशोक शुक्ला, मुुंशी शाहिद को निलंबित कर दिया था।
पांच सीओ लाइन व कार्यालय समेत तीन आरआई व सहायक लेखाकार को दोषी बनाकर विभागीय जांच के आदेश दिए गए। सिपाही नरेश की चरित्र पंजिका व प्रमोशन के फार्म बिना उसके आए भरने के मामले में तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र राजपूत पर रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
एसपी व एएसपी ने वरिष्ठ लिपिक मोहम्मद महमूद व सहायक लिपिक रनवीर सिंह को मुकदमे में वादी बनने के आदेश दिए थे। दोनों लिपिकों ने वादी बनने से इनकार कर दिया था।
शुक्रवार की शाम सीओ अमृतपुर राजवीर सिंह अपने कार्यालय में महमूद के नमाज पढ़कर लौटने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही महमूद कार्यालय आए सीओ ने उन्हें अपनी गाड़ी में बैठा लिया और कोतवाली फतेहगढ़ ले आए।
वह दबाव बनाकर उनसे तहरीर लिखवाई और प्रेमचंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया था। वरिष्ठ लिपिक महमूद की नाफरमानी करना पुलिस अफसरों को नागवार गुजरी। इस पर एसपी के आदेश पर महमूद से वरिष्ठ लिपिक का चार्ज छीन लिया गया। उनके स्थान पर सहायक लिपिक कौशल किशोर राठौर को ये जिम्मेदारी दी गई है।
शनिवार का शाम पीएसी महानगर लखनऊ में कार्यरत तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र राजपूत एसपी से गुहार लगाने फर्रुखाबाद पहुंचे। उन्होंने एकतरफा कार्रवाई को लेकर जिले के सांसद मुकेश राजपूत को आपबीती सुनाई है।
सांसद ने हर स्तर पर मदद करने का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि वह एसपी डॉ. अनिल मिश्रा से मुलाकात करके अपना पक्ष रखेंगे।