गेहूं की फसल की थ्रेसिंग करते किसान।
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रविवार सुबह आसमान में छाए बादल और हल्की बूंदाबांदी से किसानों के माथे पर चिंता की रेखाएं उभर आई हैं। गेहूं की फसल तकरीबन सभी खेतों में पकी खड़ी है। ज्यादा बारिश होने से फसल पूरी तरह से जमींदोज हो सकती है। किसान आसमान में छाए बादलों को संकट के बादल समझ रहा है।
गेहूं के साथ-साथ अभी गांवों में आलू के ढेर भी लगे हुए हैं। यदि बारिश हुई तो आलू भीगने के बाद न तो शीतगृह में डालने योग्य रह जाएगा और न ही बीज के योग्य रह जाएगा। जिले में करीबन एक लाख हेक्टेयर भूमि से अधिक खेतों में गेहूं की फसल अभी से तैयार हो रही है।
मौसम जिस तरह से करवट बदल रहा है तो किसानों का अनुमान है कि बारिश के साथ ओले भी संभव है। ओला पड़ने से गेहूं खेतों में ही झड़ जाएगा। किसानों के घर तक गेहूं नहीं पहुंच सकेगा। इस संबंध में गांव कुइंयाधीर के रहने वाले सुधांशु गंगवार का कहना है कि गर्मी में होने वाली बारिश किसानों के लिए कहीं से हितकर नहीं होती है।
इस समय खेतों में पूरी तरह से गेहूं पका खड़ा है। यदि बारिश होती है तो केवल भूसा ही किसानों के हिस्से में आएगा। विकास खंड कमालगंज के गांव ताजपुर के रहने वाले नेत्रपाल का कहना है कि अभी उनका आलू खेतों में ही लगा है। यदि बारिश होती है तो आलू पूरी तरह से भीग जाएगा। उनका कहना है कि होली की वजह से आलू मंडी तकरीबन पांच दिन बंद रही है। इस वजह से अभी हजारों की संख्या में किसानों का आलू घर अथवा खेत में लगा है। इसके भी भीग जाने का अनुमान है।
अमृतपुर प्रतिनिधि के अनुसार गांव गढ़ैया के रघुवीर ने बताया कि अगर बारिश होती है तो गेहूं की फसल बर्बाद हो जाएगी। अमृतपुर निवासी जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले साल भी इसी तरह की बारिश से फसल नष्ट हुई थी। कुदरत के कहर से किसानों की कमर टूट सकती है। ताजपुर के ब्रजपाल ने कहा कि ईश्वर से बस यही प्रार्थना कर रहे हैं कि बरसात न हो। नहीं तो खाने को दाना तक नहीं बचेगा।