लोहिया अस्पताल में सोमवार को पर्चा बनवाने के लिए काउंटर पर मरीजों की कतारें लगी रहीं। फिजीशियन के कमरे के बाहर पहले दिखाने के लिए मरीजों के बीच धक्का-मुक्की हुई। जैसे-तैसे अस्पतालकर्मियों ने भीड़ को संभाला।
बाल रोग विशेषज्ञ के न मिलने पर तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल में बुखार से पीड़ित 81 मरीजों की खून की जांचें की गईं। इनमें सात को मलेरिया और 32 को टाइफाइट होने की पुष्टि हुई।
लोहिया अस्पताल में सोमवार को बुखार के साथ ही अन्य बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक थी। यह इसलिए कि शनिवार को मध्यावकाश के कारण मरीज बगैर इलाज के लौट गए थे। अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की भीड़ जमा हो गई थी।
पर्चा काउंटर पर महिलाओं और पुरुषों की लंबी लंबी कतारे लगी हुई थी। यहां पर 927 मरीजों ने अपना इलाज के लिए पर्चे बनवाए। सुबह जैसे ही फिजीशियन अपने कक्ष में पहुंचे उसी समय भीड़ पहले अपने को दिखाने के लिए धक्कामुक्की करने लगी।
इस दौरान जूनियर डाक्टर ने भीड़ को एक किनारे किया और लाइन से आने की बात कही। इसके बाद फिजीशियन और जूनियर डाक्टर ने मरीजों को देखना शुरू किया। सोमवार को दोपहर 12 बजे बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर राजेश तिवारी अपने कक्ष में नहीं बैठे हुए थे।
डाक्टर एसपी सिंह की आपातकालीन ड्यूटी होने के कारण वह अपने कक्ष में नहीं बैठे हुए थे। हृदय रोग विशेषज्ञ डाक्टर मनोज पांडेय भी अपने कक्ष में नहीं बैठे हुए थे। जिस कारण मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। काफी मरीज अपने इलाज के लिए इधर उधर भटकते रहे।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डाक्टर बीके दुबे का कक्ष भी बंद था। लोहिया अस्पताल में सोमवार को मलेरिया की आशंका में 81 मरीजों की खून की जांच की गई। इनमें 7 मरीजों की पुष्टि हुई। जिसमें मोहिनी पुत्री शिशुपाल निवासी मुड़ेर जिला हरदोई, सारिक पुत्र साबिर निवासी मऊदरवाजा, वसीमुद्दीन, मुजाब्बिर निवासी पांचालघाट, आशीष निवासी महमदपुर फर्रुखाबाद, मधू पत्नी श्यामबहादुर निवासी हुल्लापुर शाहजहांपुर, सत्यम पुत्र रामकुमार थे।
इसके अलावा 74 मरीजों को टाइफाइड की आशंका में खून की जांच की गई, जिनमें 32 मरीजों को इसकी पुष्टि की गई।