फर्रुखाबाद। गंगा किनारे बसे बाढ़ प्रभावित गांवों में इस बार भी बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। प्राथमिक से जूनियर तक के स्कूलों में महीने भर से पानी भरा होने के चलते ताले लटके हुए हैं। बच्चे घरों में कैद होकर वक्त गुजार रहे हैं जबकि पाठ्यक्रम और परीक्षाओं में पिछड़ते जा रहे हैं। डिजिटल युग में ग्रामीण इलाकों में नेट और स्मार्टफोन की सुविधा न होने के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
आज के डिजिटल युग में स्कूल बंद होने पर शहरों के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखते हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों का हाल बुरा है। बाढ़ के चलते गांवों में बिजली काट दी गई। स्कूलों में पानी भरा होने के चलते करीब 350 स्कूल बंद चल रहे हैं। शिक्षा विभाग 230 स्कूलों को बाढ़ से प्रभावित होने का दावा कर रहा है। गांवों में बच्चों को न तो इंटरनेट की सुविधा मिल पा रही है और न ही स्मार्टफोन की। जिनके घरों में स्मार्टफोन हैं भी वह बिजली न होने के कारण चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। अनिल कुमार निवासी हमीरपुर मजरा जात ने बताया कि बाढ़ के कारण पुत्र स्कूल नहीं जा पा रहा है। ऑनलाइन क्लासेस यहां होती ही नहीं हैं। फिर भी स्कूल कहता है फीस जमा करो, तभी पढ़ाई होगी।
इकलहरा गांव के रहने वाले अरविंद ने बताया कि हर साल यही हाल होता है। शहरों में बच्चे ऑनलाइन पढ़ते रहते हैं, लेकिन हमारे बच्चे पिछड़ जाते हैं। सरकार राहत सामग्री तो देती है, लेकिन शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं है। इससे बच्चों का भविष्य अधर में है।बीएसए अनुपम अवस्थी ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में स्कूलों में पानी भरा होने के कारण पढ़ाई बाधित हो रही है। बिजली कटी होने से ऑनलाइन शिक्षण भी नहीं हो सकता है। ऐसी स्थिति में क्या ही किया जा सकता है।