फर्रुखाबाद। जनपद के किसी भी मदरसे में छात्रावास की सुविधा नहीं है। जिम्मेदारों की मिलीभगत के चलते 34 मदरसों में 1565 छात्रों की हास्टलर छात्रवृत्ति आहरित कर ली गई। मामला पकड़े जाने पर अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए मदरसा संचालकों को नोटिस जारी कर रिकवरी के आदेश दिए। अब तक मात्र 10 फीसदी ही छात्रवृत्ति रिकवरी की जा सकी। इसके बावजूद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से मदरसा संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जनपद में 150 से अधिक मदरसा संचालित हैं। गत वर्ष 33 मदरसा व एक स्कूल से बिना छात्रावास के ही हॉस्टलर छात्रवृत्ति के आवेदन किए। खंड शिक्षा अधिकारियों के सत्यापन के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से भी आवेदन पास कर दिए गए। मिलीभगत के खेल के चलते 1565 छात्रों के नाम से हास्टलर छात्रवृत्ति आहरित कर ली गई। सामन्य छात्र से हॉस्टलर छात्रों को 6000 रुपये अधिक छात्रवृत्ति मिलती है। करीब एक करोड़ के गोलमाल का मामला सुर्खियों में आया तो अधिकारियों ने खुद को फंसता देख मदरसा संचालकों को नोटिस जारी कर दिए। इसमें छात्रवृत्ति रिकवरी न होने पर मदरसों का पंजीकरण निरस्त करने व एफआईआर कराने की धमकी भी दी गई थी। इसके बाद दो-चार छात्र संख्या वाले मदरसा संचालकों ने रिकवरी कराकर स्टेट के नोशनल खाते में पैसा जमा करा दिया। जबकि 100 से लेकर 300 से अधिक छात्र संख्या वाले मदरसा संचालकों के कान पर जूं तक नहीं रेंगा।
हालात यह हैं कि अब तक करीब 200 छात्रों की छात्रवृत्ति रिकवरी कराई जा सकी। बताया जा रहा है कि मिलीभगत के चलते संविदा कंप्यूटर आपरेटरों के भरोसे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग चलता रहा। शाहजहांपुर का भी चार्ज होने से तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विभाग में एक सप्ताह में तीन दिन का ही समय दे पाते रहे। इससे मदरसा संचालकों के मुंह लगे कंप्यूटर आपरेटर भी लालच के चलते उनकी मन की करते रहे।
तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के सेवानिवृत्ति के बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी राजेश बघेल को चार्ज दिया गया। उन्होंने बताया कि विभाग से मदरसा संचालकों को कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के बिना आदेश मिले कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।