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छह हजार अल्पसंख्यक फर्जी छात्रों के छात्रवृत्ति आवेदन निरस्त

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फर्रुखाबाद। अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति में इस बार पहले से ही फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाया गया। मदरसा व स्कूलों के सत्यापन में करीब छह हजार छात्र फर्जी पाए गए। इससे उनके आवेदन निरस्त कर दिए गए। इनमें फर्जीवाड़ा करने वाले सात स्कूलों को तो छात्रवृत्ति की सूची से ही आउट कर दिया गया। इसको लेकर कुछ मदरसा संचालक अधिकारियों पर दबाव भी बना रहे हैं।
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जनपद में संचालित मदरसों में छात्रवृत्ति का बड़े स्तर पर खेल है। गत वर्ष 33 मदरसों के 1565 छात्रों के नाम से बिना छात्रावास के हास्टलर छात्रवृत्ति आहरित कर ली गई। इसमें विभागीय लापरवाही के चलते अब तक रिकवरी नहीं की जा सकी। इस बार अल्पसंख्यक छात्रों ने छात्रवृत्ति के लिए आनलाइन आवेदन किया। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी ने 111 मदरसा व स्कूलों में छात्रों, सुविधाओं के सत्यापन के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी। सत्यापन में करीब 19000 पूर्व दशम व दशमोत्तर छात्रों में से छह हजार से अधिक आवेदन फर्जी पाए गए। इनमें सात स्कूल तो ऐसे मिले जिनमें एक भी अल्पसंख्यक छात्र मिला ही नहीं, जबकि 700 से अधिक छात्रों के छात्रवृत्ति आवेदन किए गए थे। इन स्कूलों को छात्रवृत्ति सूची से बाहर कर दिया। इससे कुछ मदरसा संचालकों के मंसूबों पर पानी फिर गया। अब अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर छात्रवृत्ति आवेदन अग्रसारित करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ तो अधिकारी के घर लिफाफा भी पहुंचाने का प्रयास कर चुके हैं। विदित है कि पूर्व में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का जनपद शाहजहांपुर का भी कार्यभार था। इससे वह जिले में सप्ताह के तीन दिन ही दे पाते थे। शेष दिन विभाग के कंप्यूटर आपरेटर ही मदरसा संचालकों की साठगांठ कर खेल करते रहते थे। हास्टलर छात्रवृत्ति घपले के बाद उन पर भी शिकंजा कस गया है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी राजेश कुमार बघेल ने बताया कि पूर्व दशम के पात्र 12109 छात्रों के छात्रवृत्ति आवेदन अग्रसारित कर दिए गए। जबकि 6000 से अधिक निरस्त हुए हैं। दशमोत्तर में 785 व व्यवसायिक शिक्षा के 67 पात्र छात्रों के आवेदन अग्रसारित किए गए। उन्होंने बताया कि कोई कितना भी दबाव बनाए, काम नियम से ही होगा। फर्जीवाड़ा नहीं चलने दिया जाएगा।
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