संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी
है। संस्कृत स्कूलों में शिक्षकों की बढ़ोत्तरी होगी और संस्कृत पढ़ने के
लिए बच्चों को जागरूक किया जाएगा। यह बात यहां महिला सभा की राष्ट्रीय
उपाध्यक्ष/ संस्कृत संस्थान की अध्यक्ष डा. साधना मिश्रा ने कही। अध्यक्ष
ने कहा कि जिले में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सम्मेलन कराया
जाएगा।
नेकपुर में संस्कृत संस्थान अध्यक्ष डा. मिश्रा ने पत्रकारों से
बात करते हुए कहा कि प्रदेश में संस्कृत विद्यालयों की दुर्दशा है। इस
कारण संस्कृत शिक्षा दिन पर दिन पिछड़ती जा रही है। इसके उत्थान के लिए
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कवायद शुरू कर दी है। संस्कृत के साथ ज्योतिष
शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए 11 मंडलों में ज्योतिष शिक्षा
सिखाने के लिए
वर्कशाप का आयोजन होगा। संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए
प्रत्येक जिले में संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसका शुभारंभ
फर्रुखाबाद जिले से किया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। संस्कृत
स्कूलों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी
जाएगी। इनमें शिक्षकों की तैनाती, खाली पदाें व स्कूलाें की संपत्तियाें
पर कब्जे
की स्थिति भी जानी जाएगी। रिक्त पदों पर भर्ती के साथ ही शासन से
बजट भी दिलवाया जाएगा।
इस दौरान सुषमा जाटव, नरेश चंद्र दुबे, सुखदेव
दीक्षित, रामचंद्र मिश्रा, दयाशंकर मिश्रा, चमन शुक्ला, जमील अहमद, ओम
प्रकाश शर्मा, राहुल मौजूद रहे। डा. साधना मिश्रा को राष्ट्रीय शैक्षिक
संघ के अध्यक्ष संजय तिवारी ने पदाधिकारियों के साथ 10 सूत्री ज्ञापन
दिया। इसमें कहा गया कि एमडीएम का वितरण किसी संस्था से कराया जाए।
शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कराया जाए। ड्रेस वितरण, भवन
निर्माण, शौचालय और चहार दीवारी निर्माण कार्यदायी संस्था से होना चाहिए।