रामनगरिया में धर्म की अविरल धारा प्रवाहित करते साधुसंत और भवसागर पार
जाने की इच्छा लिए कल्पवासी रात-दिन ईश्वर आराधना में संलग्न हैं।
श्रीमद्भागवत कथा, रामचरित मानस लोगों को सनातन धर्म की ओर प्रेरित कर रही
हैं। यहां लोग भौतिक जगत के संचित धन से अन्नदान, वस्त्र दान, भंडारा आदि
अनुष्ठानों से परलोक को साधने में व्यस्त दिखाई
देते हैं। मौनी अमावस्या पर
कड़ाके की ठंड होने के बावजूद लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।
क्षेत्र में कल्पवास कर रहे साधुसंतों ने शोभायात्राएं व कल्पवासियों ने
कलश यात्रा निकाली। इसका लोगों ने जगह-जगह स्वागत किया। सांस्कृतिक पांडाल
में रासलीला का मंचन भी शुरू हो गया है। वृंदावन से आए कलाकारों ने कृष्ण
की लीलाओं का जीवंत मंचन किया। शीतलहर के चलते मेला क्षेत्र में सन्नाटा
पसरा रहा। घाटों पर भरे पानी की भले ही प्रशासन ने सुध न ली हो लेकिन
भक्तों को कोई कष्ट न हो। इसके लिए गंगापुत्रों ने रेत से गड्ढों को भरना
शुरू कर दिया है।
मौनी अमावस्या पर गंगा में लगाई डुबकी
माघ
मास के तीसरे बड़े स्नान मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान करने के लिए
स्नानार्थियों के जत्थे रात से ही आना शुरू हो गए थे। सुबह तड़के कई जिलों
से आए स्नानार्थियों ने स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। लोगों ने
गंगा को पहरावन के साथ दान-पुण्य किया। जगह-जगह लोगों ने सत्य नारायण की
कथाएं करवाईं। देर शाम तक लोगों का आना जारी रहा।
कलश व शोभायात्राओं की रही धूम
रामनगरिया
क्षेत्र में अखिल भारतीय दुर्गा परिवार उत्तर बंधा की ओर से दयालु जी
महाराज की अध्यक्षता में शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में काली का
अखाड़ा को देखने के लिए भीड़ जुटी। यहां आगे चल रहे दंडी स्वामी समेत जगदीश
स्वरूप ब्रह्मचारी, मनोजानंद, अवधेशानंद, रामस्वरूप ब्रह्मचारी, रमेश
स्वरूप ब्रह्मचारी, श्यामा आश्रम आदि संतों का
कल्पवासियों ने माला पहनाकर
स्वागत किया। वहीं जूना अखाड़ा की ओर से निकाली गई शोभायात्रा में ठाकुर
जी महाराज की पालकी निकाली गई। पांचवीं सीढ़ी से बंधा होती हुई पालकी
गंगातट पर पहुंची। यहां मंत्रोच्चारण के साथ सालिगराम को गंगा स्नान कराया
गया। पूजन-अर्चन के बाद शोभायात्रा ने रामनगरिया क्षेत्र का भ्रमण किया। इस
दौरान हरिओमानंद सरस्वती, आनंद गिरि, सोमवारपुरी, शनिवारपुरी, लखनस्वरूप
और राजेश्वरानंद आदि संत मौजूद रहे।
भागवत कथा आज से
बुधवार
से शुरू हो रही भागवत कथा को लेकर मंगलवार को पुरुष और महिलाओं ने सिर पर
कलश रखकर यात्रा निकाली। यह यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई कथा पांडाल
पहुंची। यहां अविचल शास्त्री ने भागवत को स्थापित किया। उन्होंने बताया कि
बुधवार से भागवत कथा प्रारंभ होगी। इस अवसर पर रामप्रकाश आश्रम, सुखदेव
आश्रम और राघवा आश्रम आदि मौजूद रहे।
गंगा पुत्राें ने भरे घाटाें के गड्ढे
गंगा
का जलस्तर बढ़ने से कई घाटों पर जलभराव हो गया। इससे स्नानार्थियों को
आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे पंडों के यहां आने
वाले यजमानाें को दिक्कत होती है। पंडों का कहना है कि जलभराव के चलते लोग
उन्हें बगैर दानपुण्य किए ही निकल जाते हैं। जलभराव की समस्या को मेला
प्रशासन के समक्ष रख चुके हैं लेकिन कोई सुध नहीं ली गई। भक्तों को कोई
कष्ट न हो इसलिए वह रेत से गड्ढे भर रहे हैं।
धार्मिक के साथ राजनीतिक लाभ का प्रयास
रामनगरिया
क्षेत्र में एक तरफ धार्मिक बयार है तो दूसरी ओर स्नानार्थियों के स्वस्थ
मनोरंजन के भी इंतजाम किए गए हैं। वहीं इस क्षेत्र में कई कल्पवासी ऐसे
हैं, जो कथा के दौरान बैनर लगाकर अपना राजनीतिक प्रचार करने में भी जुटे
हैं। एक कथा वाचक के पीछे लगे बैनर में पंडित जगदीश शरण जिला पंचायत सदस्य
प्रत्याशी हरदोई लिखा है। कथावाचक का कहना है कि यहां आने वाले लोग कथा से
लाभान्वित होने के साथ प्रत्याशी के बैनर से भी रूबरू हो रहे हैं।
रासलीला देख भक्त भावविभोर
रामनगरिया
के सांस्कृतिक पांडाल में रासलीला का भी मंचन शुरू हो गया है। वृंदावन से
आए कलाकारों ने कृष्ण की बाल लीलाओं का जीवंत मंचन किया। रासलीला में पूतना
वध, वकासुर वध, अकासुर वध की कई लीलाएं देर रात तक चलती रहीं। यहां
कलाकारों ने कृष्ण की बाल लीलाओं को दिखा भक्तों को भावविभोर कर दिया।
मेला क्षेत्र में पसरा सन्नाटा
कड़ाके
की सर्दी के चलते मेला क्षेत्र में सन्नाटा पसरा है। यहां बच्चों के लिए
लगाए गए कई प्रकार के झूले शांत हैं। झूला संचालकों का कहना है कि सर्दी के
चलते लोग मेला में बच्चों को नहीं ला रहे हैं। सर्दी का यही आलम रहा तो इस
बार उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
श्रीमद्भागवत में बसते हैं नारायण
दंडी
आश्रम में भागवत कथा में स्वामी जगदीश स्वरूप महाराज ने कहा कि भगवान
नारायण का वास श्रीमद्भागवत में है। उन्होंने कहा कि जब कलियुग का पदार्पण
होने वाला था तो भगवान कृष्ण यदुवंशियों के साथ द्वारिकापुरी सिधार गए।
यहां यदुवंशियों द्वारा अनैतिक आचरण करने के चलते आपस में युद्ध हुए और
धीरे-धीरे यदुवंश समाप्ति की ओर जाने लगा। उसी दौरान भगवान ने भी इस भूलोक
को छोड़ने का मन बनाया। बहेलिये के आखेट के दौरान लगे बाण ने प्रभु के
क्षीरसागर
जाने का मार्ग प्रशस्त किया। जब बहेलिया को पछतावा हुआ तो उसने
भगवान कृष्ण के चरणों में गिरते हुए इस अपराध के लिए क्षमा याचना की। कृष्ण
ने कहा कि यह तो मेरी ही लीला थी। उन्होंने बहेलिया से कहा कि त्रेतायुग
में तुम बालि थे मैंने भी तुम्हें छिपकर मारा था। यह उसी का बदला है। इस
पृथ्वी का नियम है कि जो जिस प्रकार के कार्य करता है। उसे
उसी प्रकार का
फल मिलता है। उस नियम का ही मैंने पालन किया है। भगवान के प्रस्थान करने
के समय भगवान शंकर, ब्रह्मा समेत तमाम देवतागण उन्हें लेने के लिए आए। किसी
ने क्षीरसागर चलने की प्रार्थना की तो किसी ने स्वर्ग में चलने की
प्रार्थना की। भगवान कृष्ण ने कहा कि इन सब स्थानों पर मैं रह चुका हूं अब
तो मैं श्रीमद्भागवत में ही निवास करूंगा। कथा के बाद प्रसाद का वितरण किया
गया।
आज आएंगी मालिनी अवस्थी
लोक गायिका मालिनी अवस्थी बुधवार क
ो मेला रामनगरिया के संास्कृ तिक पांडाल में प्रस्तुतियां देंगी। एसडीएम
सदर सुनील वर्मा ने बताया कि रात 8 बजे से यह आयोजन होगा।