फर्रुखाबाद। ब्रह्मलीन स्वामी पूर्णेश्वरानंद सरस्वती के षोडष संस्कार में शामिल होने आए मध्यप्रदेश के भानपुरा मठ के युवाचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने कहा कि साधुओं का काम गोली चलाने का नहीं है। संत तो अपनी वाणी से ही लोगों को सही मार्ग दिखाते हैं।
आत्मानंद विज्ञानपीठ के महंत स्वामी पूर्णेश्वरानंद सरस्वती के षोडष संस्कार में भाग लेने आए युवाचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने शनिवार को रामनगरिया में साधुओं को उपदेश दिए। कार्यक्रम में उत्तराधिकारी के विवाद पर उन्होंने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कराई।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी ने कृष्णानंद ब्रह्मचारी को अपना उत्तराधिकारी बनाया है तो इसमें लड़ने की क्या बात है। दंडी साधु का सबसे बड़ा अस्त्र दंड होता है। युवाचार्य ने कहा कि साधु कभी भी लड़ाई नहीं करते हैं। वह संस्कार में भटके हुए लोेगों को भगवत प्राप्ति का रास्ता दिखाते हैं। इस मौके पर परमानंद सरस्वती आदि दंडी साधु मौजूद रहे।