वीणा साहित्य समारोह के कार्यक्रम में काव्य पाठ करते राम शंकर अवस्थी अबोध। संवाद
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फर्रुखाबाद। साहित्य ही राष्ट्र की संजीवनी है। यही मानवीय चेतना का जागरण मंत्र है। यह बात वीणा साहित्य परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामबाबू मिश्र ने कही।
शहर के कुचिया स्थित नजराज भवन में परिषद की साहित्य चर्चा और कवि गोष्ठी हुई। इसमें परिषद अध्यक्ष प्रो. रामबाबू मिश्र ने कहा कि यदि जीवन को संवारना है, तो स्वाध्याय बेहद जरूरी है। आचार्य ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री ने कहा कि साहित्य सत्य, शिव व सौंदर्य की अभिव्यक्ति है। डॉ. शिवओम अंबर ने कहा कि साहित्य मानवता का मंगलगान है। डॉ. संतोष पांडेय ने साहित्य को आत्मा का प्रकाश बताया।
कवि गोष्ठी में डॉ. निराला राही, श्याम सुंदर, अंशुम दीक्षित, रामौतार शर्मा इंदु और महामंत्री दिलीप कश्यप के काव्यपाठ पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। साहित्यकार आचार्य ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री व डॉ. शिवओम अंबर का परिषद ने अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में बीके सिंह, गीता भारद्वाज, राघव यादव, शिवस्वरूप चौबे, निमिष टंडन, आदेश दी क्षित, मिंटू मिश्रा आदि थे। अध्यक्षता संतोष पांडेय, संचालन दिलीप कश्यप ने किया। संयोजन रामशंकर अबोध व रामौतार शर्मा इंदु रहे।