सूचना के बाद निरंकारी भवन में बैठे गमगीन अनुयायी।
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अध्यात्म सम्राट निरंकारी संत बाबा हरदेव सिंह की मार्ग दुर्घटना में मौत की खबर पाकर उनके शिष्यों को करारा झटका लगा है। भारी संख्या में निरंकारियों ने आश्रम पहुंचकर बाबा की देशनाओं पर गमगीन माहौल में प्रकाश डाला और कहा कि निरंकार का मंत्र देने वाले बाबा हरदेव सिंह का पार्थिव शरीर भले ही नष्ट हो गया हो लेकिन वह अपने अनुयायियों के कंठ से सदैव बोलेंगे और सत्य के हर शब्द के साथ उनका साक्षात्कार होगा।
बाबा हरदेव सिंह के आश्रम में मौजूद ब्रांच प्रमुख रमेशचंद्र ने कहा कि उन्हें अपने गुरू हरदेव सिंह निरंकारी की मार्ग दुर्घटना में मौत का समाचार मिल चुका है। जिले में बाबा के तकरीबन 1500 शिष्य हैं जो कि हर रविवार को बाबा के द्वारा बताए गए सत्संग, भजन-पूजन में शामिल होते हैं। बढ़पुर स्थित संत निरंकारी आश्रम में मौजूद मूलचंद्र प्रचारक, संजीव चौहान, रामनिवास अवस्थी, रामनरेश, रमेशचंद्र निरंकारी समेत दर्जनों लोगों की आंखों में पानी और जुबान पर बाबा के सत्संग के चर्चे नजर आ रहे थे।
बाबा की मौत पर गमगीन निरंकारी संतों का कहना था कि भारी संख्या में बाबा के शिष्य दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। बाबा हमेशा अपने शिष्यों को यही बताते थे कि शरीर मरणोधर्मा है। यह नष्ट हो जाता है लेकिन आत्मा अजर-अमर है। वह अविनाशी है। वह न कभी जन्म लेती है न कभी मरती है। इसलिए आत्मा को नेती-नेती कहा गया है। शास्त्रों में भी नैनं छिंदंति शस्त्राणि, नैनं दहति पावक:, जिसे शस्त्र वेध नहीं सकते और अग्नि जला नहीं सकती वह आत्मा हमेशा अमर है।
बाबाजी का शरीर भले ही नष्ट हो गया हो लेकिन वह अपने हजारों शिष्यों के कंठ से बोलकर अध्यात्म का संदेश देंगे और हर हवा के शीतल झोंके में उनसे उनके शिष्यों और शुभचिंतकों का मिलन होगा। बाबा हरदेव सिंह की मौत की खबर पाते ही यहां शोक की लहर दौड़ गई और गमजदा माहौल में दर्जनों शिष्य आश्रम पर आकर बाबा की यादों को ताजा करते दिखे।