फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संकिसा की आबोहवा में बुद्ध के अहसास

Sat, 31 Jan 2015 11:13 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
संकिसा की आबोहवा में लंबे समय बाद बुद्ध का अहसास दिख रहा है। दूर से दिखती पताकाएं और बौद्ध अनुयायिों का काफिला यहां के माहौल को ऐतिहासिक बना रहा है। ऐसी मान्यता है कि करीब 2600 साल पहले जब महात्मा बुद्ध यहां अवतरित हुए तो उनके उपदेश सुनने के लिए कई राज्याें से अनुयायी पहुंचे थे। इन दिनों बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा
विज्ञापन


पेन्जिन ज्ञात्सो के पहुंचने से उनका प्रवचनों सुनने के लिए 27 देशों के बौद्धिस्ट यहां पहुंचे हैं। इस अनुयायियों का भी क हना है कि उन्हें संकिसा की आबोहवा में बुद्ध की मौजूदगी का अहसास हो रहा है। विभिन्न देशों से आए आनुयायी कभी यहां की माटी को छूते हैं तो कभी बाहें फैलाकर बुद्ध के यहीं कहीं आसपास होने का अहसास कर रहे हैं।

फर्रुखाबाद मैनपुरी जिले के बार्डर गांव जसराजपुर में दो दिवसीय प्रवचन के लिए दलाई लामा गुरुवार को संकिसा पहुंचे हैं। इनके आगमन से 2600 साल पहले के इतिहास के पन्ने उड़ने लगे हैं। इनमें से  कई चीजें नए माहौल में पुरानी यादों को पलट देती हैं। तब राजा दीर्घाशक ने अतिथियाें के ठहरने के लिए इंतजाम किए  थे। अबकी चीजें समय के मुताबिक बदली हुई हैं।
विज्ञापन


संकिसा में 8 देशों के बुद्धिस्टाें ने मंदिर बनवाए हैं। वर्मा, भूटान, म्यामार, श्रीलंका, जापान, ताइवान व कोरिया के भव्य मंदिराें में आगंतुक ठहरे हैं। कंबोडिया का मंदिर निर्माणाधीन है।  कोरिया से आए जो  संकिसा की हर चीज को पवित्र मानते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें सभी जगह बुद्ध मुस्कुराते नजर आते हैं। फिनलैंड की ऐला व एस्काटलैंड के माइक का कहना होता है

कि अहिंसा, शांति व सबके कल्याण का बुद्ध का यहां दिया गया संदेश उन्हें फूलाें पत्तियाें, परिंदों में सभी जगह नजर आ रहा है। यूएसए की नताली भी ऐसी ही भावनाआें से लबरेज   हैं। फ्र ांस की आफरीदी  कहती हैं कि भारत अद्भुत है। इसलिए भी यहां बुद्ध ने जन्म पाया। ज्ञान भी हासिल हुआ। प्रचवन के बाद विदेशी बुद्ध अनुआई आसपास के गांवों में जाकर यहां की लोक संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं।

राघव परिवार से मुलाकात रविवार को
दलाई लामा के रविवार की  सुबह राघवदत्त दीक्षित परिवार से मिलेने की संभावनाए हैं। 1960 में संकिसा आगमन पर दलाई लामा इनके घर पहुंचे थे। यहां उन्हाेंने म्यूजियम भी देखा था। राघव ने यहां पर संकिसा के इतिहास से जुड़ी कई चीजाें को सजा रखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें