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Farrukhabad News: केवट संवाद की लीला देख भावविभोर हुए श्रद्धालु

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शमसाबाद। रामलीला महोत्सव में शुक्रवार को भगवान श्रीराम और केवट के संवाद की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से प्रभु श्रीराम के वनगमन और केवट की अटूट भक्ति के प्रसंग को जीवंत कर दिया। इसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
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मंचन में दिखाया गया कि वनवास के दौरान गंगा पार करने के लिए भगवान श्रीराम केवट से नाव में बैठाने का आग्रह करते हैं। केवट पहले उनके चरण पखारने की इच्छा जताता है। चरण पखारने के बाद वह प्रभु श्रीराम को गंगा पार कराता है। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने भगवान के प्रति केवट के प्रेम, श्रद्धा और समर्पण को दर्शाया।
लीला के दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष श्याम मिश्रा, नवनीत रस्तोगी, आलोक, संजय गंगवार, जितेंद्र कुमार, अवधेश पांडेय, सुमित कुमार आदि मौजूद रहे।
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दशरथ मरण और भरत मिलाप के मंचन से आंखें नम
फोटो-33 रामलीला मंचन के दाैरान राम वनवास का दृश्य। स्रोत: पाठक
संवाद न्यूज एजेंसी
कंपिल। कस्बा में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव के दसवें दिन बृहस्पतिवार रात दशरथ मरण, भरत के अयोध्या लौटने और चित्रकूट में भरत मिलाप का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
मंचन में भगवान श्रीराम के वनवास जाने के बाद पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने का प्रसंग दिखाया गया। इसके बाद अयोध्या लौटे भरत को पिता के निधन और श्रीराम के वनवास की जानकारी मिलने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। भरत ने माता कैकेयी के निर्णय पर दुख जताते हुए श्रीराम को वापस अयोध्या लाने का संकल्प लिया।
चित्रकूट में भरत और श्रीराम के मिलाप का दृश्य विशेष आकर्षण रहा। भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने पिता के वचन का पालन करते हुए वनवास पूरा करने की बात कही। इसके बाद भरत श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटने को तैयार हुए।
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चलत राम लखि अवध अनाथा, विकल लोग सब लागे साथा...
फोटो-34 कमालगंज के रामलीला मैदान में श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण व सीता के साथ वन को जाते हुए। स्रोत: पाठक
संवाद न्यूज एजेंसी
कमालगंज। चलत राम लिखि अवध अनाथा, विकल लोग सब लागे साथा... अर्थात अयोध्या से जब राम, लक्ष्मण और सीता वन के लिए प्रस्थान करते हैं, तो उनके पीछे पुरवासी भी चलने लगते हैं। सबका बस एक ही कहना कि राम के जाते ही अयोध्या अनाथ हो जाएगी।
रामलीला में शुक्रवार को रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम के वन गमन का भावपूर्ण मंचन किया गया। इसके बाद दशरथ मरण लीला हुई। लीला कथा में पिता राजा दशरथ के वचनों की मर्यादा रखने के लिए श्रीराम ने जरा भी हिचकिचाए बिना राजपद का मोह त्याग दिया। जानकारी पर अयोध्यावासियों की आंखें नम हो गई। श्रीराम के वन गमन की बात सुनकर माता सीता ने भी उनके साथ चलने का संकल्प व्यक्त किया। प्रभु राम ने उन्हें अयोध्या में रहकर सास-ससुर की सेवा करने की सीख दी, किंतु सीता के इस निश्चय के दृढ़ होने पर वे उन्हें साथ ले जाने को तैयार हो गए। अनुज लक्षमण अपनी माता सुमित्रा से आज्ञा लेकर प्रभु की सेवा के भाव से साथ हो लिए। प्रांशु पाठक, उज्ज्वल अवस्थी, प्रखर पालीवाल, मधुर दवे, सोम ठाकुर भी रहे। लीला आचार्य लक्ष्मीकांत द्विवेदी ने लीला निर्देशन किया।
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