अमृतपुर। रामगंगा का जलस्तर सोमवार को 45 सेमी घटकर चेतावनी बिंदु पर पहुंच गया है। रास्तों में भरा पानी उतरने से ग्रामीणों ने राहत महसूस की। वहीं, रात में बिजली भी मिलने की उम्मीद जगी है। गंगा का जलस्तर स्थिर रहा।
रामगंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने से कई गांवों में पानी घुस गया था। सोमवार को जलस्तर 137.05 मीटर से 45 सेमी घटकर चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर पर पहुंच गया। जलस्तर गिरने से बाढ़ से घिरे गांव हीरानगर, गुलरिया, कटैला, भावन, नीचे वाला चपरा, अमैयापुर, बड़ा गांव परतापुर, गैहलार, खाखिन, गुड़ेरा आदि गांव में भरा पानी निकल जाने से ग्रामीण राहत महसूस कर रहे हैं।
रास्तों में भरा पानी भी उतर गया है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से पशुओं के चारे की समस्या पैदा हो गई है। 11 हजार लाइन के खंभे पानी से घिरे होने से 12 गांव की बिजली काट दी गई थी। पानी कम होने से अब ग्रामीणों को रात नौ बजे से सुबह पांच बजे तक बिजली आपूर्ति दी जाएगी।
खो, हरेली, रामनगर से रामगंगा में 4237 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अवर अभियंता होरीलाल वर्मा ने बताया कि 11केवी लाइन के 15 पोल पानी में हैं। अनहोनी की आशंका को देखते हुए दिन में बिजली बंद रहेगी। गंगा का जलस्तर 135.35 मीटर पर स्थिर रहा। नरौरा बांध से 25060 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गांव हरसिंहपुर कायस्थ, करनपुर घाट, तीसराम की मड़ैया, जोगराजपुर के किसानों के खेत गंगा की धार काट रही है।
बाढ़ प्रभावित गांव में पहुंची स्वास्थ्य टीम
सीएमओ ने गंगा व रामगंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों में दवा वितरण करने के लिए स्वास्थ्य टीमें लगाई हैं। अमृतपुर पीएचसी के डॉ.गौरव वर्मा ने टीम के साथ गांव परतापुर कला में शिविर लगाया। वहां 130 मरीज देखकर दवा वितरित की। शिविर में खुजली, बुखार के मरीज ज्यादा आए है। डाॅ.सुधीर सिंह ने गांव गुड़ेरा में कैंप लगाकर 96 मरीजों को दवा दी है। गांव हीरानगर में पहुंचकर 126 मरीज देखे है। जुकाम, बुखार व खुजली के मरीज सर्वाधिक मिले।
एडीएम ने बाढ़ क्षेत्र का लिया जायजा
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अपर जिलाधिकारी सुभाष चंद्र प्रजापति ने रामगंगा की बाढ़ से प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने गांव गुड़ेरा, अमैयापुर गांव में जाकर लोगों से समस्याओं की जानकारी ली। हालांकि 45 सेमी जलस्तर घटने से गांवों में भरा बाढ़ का पानी उतर गया। एडीएम ने बताया कि जलस्तर घटने से अब किसी भी गांव में और रास्ते में बाढ़ का पानी नहीं भरा है। इससे कोई खतरे की बात नहीं है। फिलहाल लेखपालों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैंं।