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Farrukhabad News: गंगा के साथ रामगंगा भी उफनाईं, युवक की मौत

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फर्रुखाबाद-अमृतपुर। बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण इस सीजन में पहली बार रामगंगा चेतावनी बिंदु तक पहुंच गई है। रामगंगा नदी का पानी खेतों में भरने से तिल, बाजरा, धान, उड़द और मूंग की फसलें जलमग्न होकर खराब होने लगी हैं। वहीं गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से महज 10 सेंटीमीटर नीचे है। उधर, राजेपुर थाना क्षेत्र के भरखा में सड़क पार करते समय गहरे कटान में समाने से एक युवक की मौत हो गई।
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रविवार को रामगंगा का जलस्तर 136.60 मीटर पर पहुंच गया, जो चेतावनी बिंदु है। एक दिन में जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खो-हरेली रामनगर बैराज से रामगंगा में 26,606 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। नदी किनारे के खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। हीरानगर, गुडेरा, भावन, गैहलार, अमैयापुर, खाखिन, गंगागंज, कोलासोता, खरगपुर और राई समेत कई गांवों में फसलें पानी में डूब गई हैं।

गांवों से निकलना मुश्किल
गंगा का जलस्तर भी 136.95 मीटर से बढ़कर 137.00 मीटर पहुंच गया है। खतरे का निशान 137.10 मीटर है। नरौरा बांध से गंगा में 96,219 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर बढ़ने से फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग स्थित चित्रकूट डिप पर करीब डेढ़ फीट पानी बह रहा है। बाइक और छोटे वाहनों को यहां से निकलने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बारिश से रास्ते दलदल में तब्दील हो गए हैं, जिससे गांवों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
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घरों में रखा राशन खत्म, अब खाने-पीने का संकट
गंगा में दोबारा उफान आने से पहले से बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है। तीसराम की मड़ैया, मंझा, आशा की मड़ैया और करनपुर घाट समेत कई गांवों में घरों में रखा राशन खत्म होने लगा है। ग्रामीणों के सामने अब खाने-पीने का संकट है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नीचे खेत और रास्ते पानी में डूबे हैं और ऊपर से लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में न तो खेतों में जाकर फसल बचाने की स्थिति है और न ही गांव से बाहर निकलकर जरूरत का सामान लाने की। ग्रामीणों के सामने फसल बर्बादी के साथ रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती है।
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