असत्य पर सत्य की विजय पाने के लिए राम और रावण के बीच छिड़े महासंग्राम में आखिर अहंकार के प्रतीक रावण को भगवान राम ने मार गिराया। रावण के मरते ही लोग भगवान श्रीराम की जय-जयकार करने लगे।
श्री रामलीला मंडल फर्रुखाबाद की ओर से आयोजित रामलीला में रावण की भूमिका अदा कर रहे आंशिक दीक्षित और राम की भूमिका सत्यम दीक्षित, लक्ष्मण की देवाशीष मिश्र के बीच रेलवे रोड स्थित सरस्वती भवन से लेकर क्रिश्चियन इंटर कालेज तक घोर संग्राम हुआ।
राम रावण के शीष काटते-काटते थक गए तो विभीषण ने भगवान राम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत है। नाभि में वाण मारने से ही उसकी मौत हो सकती है। भाई के बताए मार्ग पर चलने से भगवान राम ने रावण को मार गिराया।
कहा गया कि रावण उत्तम कुल में पैदा हुआ था और पुलस्थ ऋषि का नाती था और भगवान शंकर की उसने नाना प्रकार से पूजा-अर्चना की थी। रावण के अंदर मय व्याप्त होने से शंकर के अनन्य भक्त लंकेश का भी अंत हुआ। उसके जीवन में केवल एक ही अपराध हुआ।
तमाम शक्तियों को हासिल करने के बाद रावण के अंदर अभिमान पैदा हो गया। नृप अभिमान मोह वश किम्मा, हर लाइयो सीता जगदंबा। उसने अभिमान वश सीता का हरण कर लिया। वक्ताओं ने कहा कि रावण की मौत उसी दिन सुनिश्चित हो गई थी।
अभिमानी होने के बाद भी रावण ने कह रावण सुनि सुमुखि सयानी, मंदोदरी आदि सबरानी, सब अनचुरि करब मैं तोरी, एक बार चितवा मम ओरी यह रावण के संयम का ही संवाद है। अधर्म पर धर्म की विजय का नाम ही रावण का वध है। रामलीला में रावण के मरते ही धरती डोल गई और हा-हाकार मच गया।
राम ने दशानन के पास पहुंचकर राजनीति के गुर सीखे। राम-रावण के बीच छिड़े घोर संग्राम के साक्षी जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु, पुलिस कप्तान राजेश कृष्ण तथा अपर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार, सीओ सिटी आलोक सिंह समेत नगर के गणमान्य व्यक्ति श्री रामलाली कमेटी की अध्यक्ष डा. रजनी सरीन, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, विनोद गुप्ता, रमेश सारस्वत, धीरेंद्र सारस्वत और विजय दुबे मटरलाल आदि बने।