फर्रुखाबाद। यह पहला मौका नहीं जब इस हाईवे के निर्माण और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। निर्माण के दौरान हुई बारिश में लगाए गए बिजली के पोल धंस गए थे। नाले की मिट्टी बह जाने से कई जगह सड़क कमजोर हो गई थी। कार्यदाई संस्था ने तब मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी थी।
इटावा-बरेली नेशनल हाईवे 730 सी की यह घटना न सिर्फ निर्माण कार्य में लापरवाही की ओर इशारा करती है बल्कि जिम्मेदार एजेंसियों और निगरानी तंत्र की भी पोल खोलती है। हाईवे चौड़ीकरण के दौरान ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे। जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कई बार कार्यदायी संस्था एनएचएआई के अधिकारियों को पत्र लिखे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं सांसद मुकेश राजपूत ने भी पत्र लिखकर केंद्र सरकार से हाईवे की गुणवत्ता जांचने की बात कही थी। सांसद की शिकायत पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
भजन करती वृद्धा, हादसे से कांपी जान
हादसे के वक्त सड़क किनारे झोपड़ी में शकुंतला देवी आराम कर रही थीं। वहीं सामने की दुकान पर कांवड़ियों के कपड़े बेच रहे दुकानदार ने बताया कि जोरदार धमाका हुआ, लगा जैसे जमीन फट गई हो। किसी तरह जान बची। वृद्धा ने बताया कि वह पप्पू बाबा के आश्रम में रहकर भगवत भजन करतीं हैं। सड़क का मलवा आने से एक बार तो ऐसा लगा कि अब भगवान का बुलावा आ गया।
लोगों ने की कार्रवाई की मांग
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि निर्माण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, कार्यदायी संस्था पर भारी जुर्माना लगाया जाए। उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए।