परिषदीय स्कूलों की शुक्रवार से शुरू हुई सत्र परीक्षा में बदइंतजामियां
हावी रहीं। परीक्षा के लिए पेपर नहीं छपवाए गए। बच्चों ने ब्लैक बोर्ड से
सवाल उतारे और किताबों से देखकर उत्तर लिखे। पहले दिन बच्चों की संख्या
स्कूलों में कम रही। 40 फीसदी तक बच्चे अनुपस्थित रहे। परीक्षा की स्कीम भी
तैयार नहीं कराई गई। हर जगह अलग-अलग विषयों के पेपर हुए।
सत्र परीक्षा के
पहले दिन अमर उजाला प्रतिनिधियों को स्कूलों में ऐसे ही दृश्यों से रूबरू
होना पड़ा। सत्र परीक्षा की हकीकत बयां करती अमर उजाला की रिपोर्ट।
ब्लैक बोर्ड पर लिखे गए प्रश्न
सत्र परीक्षा के लिए कहीं भी प्रश्नपत्र नहीं बंटे। उत्तर पुस्तिकाओं का
भी इंतजाम नहीं किया गया। बच्चे को अपने घर से कॉपी लाए। स्कूलों में
बच्चों की संख्या बहुत कम रही। कन्या प्राथमिक विद्यालय बढ़पुर में 118
पंजीकृत बच्चो में से 97 परीक्षा देने आए। सहायता प्राप्त शीतला जूनियर
हाईस्कूूल में 112 पंजीकृत बच्चों में से 95 उपस्थित हुए। प्राथमिक
विद्यालय बढ़पुर में पंजीकृत 145 में से 113 बच्चे उपस्थित थे। कन्या
प्राथमिक विद्यालय बढ़पुर में 56 में से 40 बच्चे आए।
जब मन चाहे आओ और परीक्षा दो
अमृतपुर में परीक्षा का कोई समय मुकर्रर नहीं किया गया। यह परीक्षा बच्चों के स्कूल
आने के अनुसार हुई। बच्चे विद्यालय समय में जब आए, उनकी परीक्षा करा ली
गई। प्राथमिक विद्यालय गूजरपुर गहलवार में परीक्षा के समय 108 पंजीकृत
बच्चों में से 70 उपस्थित हुए। प्राथमिक विद्यालय परतपुर कला में 97 बच्चों
में से 55 ही पहुंचे। उ प्राथमिक विद्यालय नीलापुर में पंजीकृत 280 बच्चों
में से 120 स्कूल में सत्र परीक्षा देने आए। पूर्व माध्यमिक विद्यालय
नीलापुर में 109 में से 40 बच्चे उपस्थित हुए।
सत्र परीक्षा के नाम पर खिलवाड़
मोहम्मदाबाद में
सत्र परीक्षाओं में नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। बच्चों
की संख्या परीक्षा के प्रथम दिन बेहद कम रही। प्राथमिक विद्यालय लखरौआ में
107 में से 78 बच्चे उपस्थित हुए। प्राथमिक विद्यालय मलोखर में 70 पंजीकृत
बच्चों में से 45 हाजिर रहे। प्राथमिक विद्यालय तेरा में 155 में से 110
बच्चे परीक्षा देने आए। प्राथमिक विद्यालय नगला दलजीत सिंह में पंजीकृत 52
में से 20 बच्चे ही परीक्षा देने को उपस्थित हुए।
बच्चों में नहीं दिखा उत्साह
शमसाबाद मे
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों में सत्र परीक्षा देने
की कोई ललक नहीं है। पंजीकृत में 60 फीसदी से भी कम बच्चे परीक्षा के पहले
दिन उपस्थित हुए। प्राथमिक विद्यालय अलेपुर में 191 में से 109 बच्चे
उपस्थित हुए। प्राथमिक विद्यालय नैगवां में 102 में से 60 बच्चे परीक्षा
देने को आए। प्राथमिक विद्यालय नगला धनी में 34 मेें से 26 हीं परीक्षा
देने का स्कूल में आए।
किताबों से देखकर लिखे उत्तर
राजेपुर मे
सत्र परीक्षा में बच्चों ने खूब नकल की। बच्चों ने झुंड लगाकर ब्लैक बोर्ड
पर लिखे गए प्रश्नों का हल किताब से देखकर लिखा। बच्चों की संख्या कम रही।
प्राथमिक विद्यालय अलीगढ़ में 154 में से 97 उपस्थित हुए। पूर्व प्राथमिक
विद्यालय राजेपुर में 301 में से 287 बच्चे उपस्थित हुए। यहां एक दूसरे की
कापी देखकर बच्चों ने परीक्षा दी। प्राथमिक विद्यालय मोहद्दीनगर में 33
पंजीकृत बच्चो में से 20 परीक्षा देने आए अन्य बच्चे परीक्षा देने नहीं आए।
मोहद्दीनगर स्कूल में बच्चो ने झुंड बनाकर प्रश्नों के उत्तर कापियों में
किताबों से देखकर लिखे।
वर्जन
यह परीक्षा बच्चों को अभी तक पढ़ाए गए
पाठ्यक्रम का टेस्ट है। स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होना एक गंभीर
विषय है। इस समस्या का तभी समाधान हो सकता है, जब बच्चों के माता-पिता
प्रतिदिन बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए
जागरूक हों। जिन स्कूलों में
लगातार बच्चों की उपस्थित कम होती है, उनके शिक्षकों को विद्यालय न आने
वाले बच्चों का नाम रजिस्टर से हटाने के निर्देश दिए हैं। बच्चो की
उपस्थिति बढ़ाने के लिए अभिभावक संघ की बैठक करने के भी शिक्षकों को पत्र
लिखा है। -योगराज सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी