कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को हर बुधवार दूध और कोफ्ता चावल दिए जाने की
मुख्यमंत्री की योजना पहले ही चरण में फेल नजर आ रही है। इसके तहत बच्चों
को दूध कम पानी ज्यादा नसीब हो रहा है। फिर भी अधिकारी गुणवत्ता का दावा कर
रहे हैं। शिक्षक महंगाई की दुहाई देकर यह खेल कर रहे हैं। बच्चों को
200-200 ग्राम दूध देने की बजाय कई
स्कूलों में 100-100 ग्राम ही देकर काम
चलाया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के राजकीय एवं सहायता प्राप्त कई
विद्यालयों में बच्चों को अभी तक दूध और कोफ्ता चावल नसीब नहीं हुआ है।
योजना को लेकर अमर उजाला की पड़ताल करती रिपोर्ट।
सौ-सौ ग्राम देकर चलाया काम
प्राथमिक
विद्यालय नगला पंचम अमृतपुर में 49 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 30 बच्चे
उपस्थित हुए। इनके लिए प्रधानाध्यापक ने दूधिया से दूध लेकर गर्म किया।
प्रत्येक बच्चे को 100-100 ग्राम दूध दिया गया। यहां कोफ्ता चावल दिया गया।
दूधिया ही नहीं आया तो दूध नहीं बटा
प्राथमिक विद्यालय, नगला
खुशहाली में 80 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 50 विद्यालय में उपस्थित हुए।
प्रधानाध्यापक ने दूधिया से दूध देने को कहा था। वह दूध लेकर नहीं आया।
दूधिया के न आने के कारण बच्चे दूध पिए बिना ही घर लौट गए।
बच्चों दूध पीने से किया इनकार
पूर्व
माध्यमिक विद्यालय, नगला खुशहाली में 50 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 12
बच्चे उपस्थित हुए। प्रधानाध्यापक ने इनके लिए दूध मंगाया। दूध गर्म कर
बच्चों को दिया गया। बच्चों ने दूध देखा और पीने से इनकार कर दिया। बच्चों
ने एमडीएम के तहत बने कोफ्ता चावल खाए।
156 बच्चों के लिए सिर्फ 20 लीटर दूध
प्राथमिक
विद्यालय, रोशनाबाद शमसाबाद में 236 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 156 बच्चे
स्कूल में उपस्थित हुए। इनके लिए प्रधानाध्यापक ने डयेरी से 20 लीटर दूध
मंगाया। दूध गर्म करने के बाद 200-200 ग्राम के हिसाब से प्रत्येक बच्चे को
वितरित कर दिया।
नहीं बांटा गया दूध
राजकीय
बालिका इंटर कालेज में बुधवार को छात्राओं को दूध नहीं बांटा गया।
विद्यालय में 400 छात्राएं हैं। इनमें 350 छात्राएं उपस्थित हुईं।
प्रधानाचार्या मीना यादव का कहना है कि एमडीएम के संबंध में जिनको प्रभारी
बनाया गया था, उनकी रिश्तेदारी में दुर्घटना हो गई है। इस कारण वह चले गए।
इसलिए दूध का वितरण नहीं हो पाया।
कई जगह दूध मिला और न ही कोफ्ता
प्राथमिक
विद्यालय राजेपुर प्रथम और द्वितीय में बच्चों को दूध नहीं दिया गया है।
इसके साथ ही कोफ्ता की जगह आलू सब्जी व चावल दिए गए। प्राथमिक विद्यालय
राजेपुर प्रथम में 178 बच्चों में 65 बच्चे और प्राथमिक विद्यालय राजेपुर
द्वितीय में पंजीकृत 169 के सापेक्ष 72 बच्चे मौजूद थे। इनको बुधवार को
एमडीएम में चावल और आलू की सब्जी दी गई। दूध नहीं
दिया गया। प्राथमिक
विद्यालय राजेपुर प्रथम की प्रधानाध्यापिका माया शर्मा और द्वितीय की
प्रधानाध्यापिका पूनम मिश्रा ने बताया कि प्रधान ने कोफ्ता और दूध उपलब्ध
नहीं करवाया। प्रधान उपदेश गुप्ता ने बताया कि उन्हें पर्याप्त राशन नहीं
मिलता है। शासन से मिलने वाले पैसे से बच्चों को दूध पिलाना संभव नहीं है।
बीईओ सुमित वर्मा ने बताया कि प्रधान और
प्रधानाध्यापिकाओं पर कार्रवाई की
जाएगी। बीएसए योगराज सिंह ने कहा कि कोफ्ता-चावल और दूध देने की जिम्मेदारी
शिक्षकों की है। अगर व्यवस्था नहीं हुई थी तो प्रधानाध्यापिकाओं को इसकी
सूचना उन्हें देनी चाहिए थी। प्रधानाध्यापिकाओं के खिलाफ कार्रवाई की
जाएगी।
शिक्षकों की यह है पीड़ा
एमडीएम के तहत मिलने
वाली कन्वर्जन कास्ट में कोई वृद्धि नहीं हुई है। पुरानी कन्वर्जन कास्ट से
दूध और कोफ्ता चावल दिया जाना है। बाजार में पैकेट वाला दूध 50 रुपये और
दूधिया से 40 रुपये लीटर मिलता है। बेसन 75 रुपये किलो है। दूध और बेसन
महंगा होने से दिक्कत हो रही है। बच्चों को दूध और कोफ्ता चावल देने पर जेब
से खर्च करना पड़ रहा है।
वर्जन
मानक के आधार पर दूध देने का
आदेश दिया है, इस संबंध में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच करने के
आदेश दिए हैं। अगर गुणवत्ता में खराब और मानक से कम दूध दिया जाता है तो उस
विद्यालय के प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-योगराज सिंह,
बीएसए