जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में बदइंतजामियां हैं। खाने को
सड़ा आलू दिया जाता है और पीने के लिए गंदा पानी। इतना ही नहीं इस पर ऐतराज
जताने वालों को डंडा दिखाकर मुंह बंद कर दिया जाता है। अधिकतर समय बिजली
गायब रहने से बच्चे गर्मी से बिलबिलाते रहते हैं। बेड पर गंदी चादरें बिछी
रहती हैं। साबुन, तेल और मंजन तक नहीं है।
यह सामान बच्चे घर से लाने को
मजबूर हैं। सबमर्सिबल खराब होने से बच्चे हैंडपंप से पानी भरकर दूसरी मंजिल
पर ले जाते हैं। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय रजलामई के पिछले हिस्से
में बड़ी-बड़ी घास खड़ी होने से अक्सर सांप कक्षों में घुस आते हैं। इन
समस्याओं पर बीएसए का रटा रटाया जवाब है। वह कहते हैं कि समस्या है तो
देखवाते हैं। कब देखवाएंगे, यह तय नहीं है।
नाश्ते में मिलता है सड़ा हुआ आलू
डायट रजलामई स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय परिसर में घुसते ही आलू
फैलाया हुआ मिलता है। इसमें ज्यादातर आलू सड़ चुके थे, जो बचे थे वह पूरी
तरह अंकुरित थे। रसोइयों ने बताया कि ठेकेदार ने सड़े आलू के पैकेट भेज
दिए। एक पैकेट फेंक दिया। दूसरे पैकेट के कुछ ही आलू ठीक हैं। उसी से काम
चला रहे हैं। बच्चों ने बताया कि नाश्ते में यही सड़ा हुआ आलू दिया जाता
है। विरोध करने पर डंडा दिखाकर धमकाया जाता है। सबमर्सिबल एक माह से खराब
पड़ा है। बच्चे
स्कूल परिसर में लगे हैंडपंप से पानी भरकर दूसरी मंजिल पर
ले जातेे हैं। जनरेटर है नहीं और बिजली बामुश्किल तीन-चार घंटे ही मिलती
है। स्कूल परिसर के पिछले हिस्से में बड़ी-बड़ी घास खड़ी है। इससे कभी-कभी
सांप बच्चों के कमरों तक में पहुंच जाते हैं। वार्डन सुष्मिता अग्निहोत्री
ने बताया कि सोमवार को पहली मंजिल के कमरे में सांप घुस आया था। उन्होंने
बताया सफाई कर्मचारी नहीं हैं। इसलिए सफाई ठीक से नहीं हो पाती। बंदरों से
भी बच्चे परेशान रहते हैं। एक-एक कमरे में दो-दो क्लासों के बच्चे बैठाए
जाते हैं, इससे दिक्कत होती है। बिस्तर पर चादरें नहीं बिछी थीं। वार्डन
ने बताया कि कुछ दिन पहले चादरें बंदर उठा ले गए। बताया कि पूर्व वार्डन
भावना गंगवार ने अभी तक उन्हें स्टोर रूम की चाबी नहीं दी है। स्टोर रूम
में बर्तन, अभिलेख और बच्चों की किताबें बंद हैं।
90 बच्चों के लिए मात्र 15 किलो दूध
गांव बीबीपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का सबमर्सिबल पंप खराब
है। यह अक्सर पानी छोड़ जाता है। बच्चे हैंडपंप से पानी भरकर दूसरी मंजिल
पर ले जाते हैं। गद्दे और बेडशीट फटे व पुराने हैं। दुर्गंध आती है। बच्चे
घर से बेडशीट आदि लाने को मजबूर हैं। कंघा, तेल, साबुन भी बच्चे घर से ला
रहे हैं। बच्चों को ड्रेसें भी नहीं मिली हैं। 90 बच्चे स्कूल में
पंजीकृत
हैं। मात्र 15 लीटर दूध आता है। इसमें से बच्चों को चाय और दूध दोनों दिए
जाते हैं। प्रभारी वार्डेन श्रुति शुक्ला ने बताया कि साबुन, तेल, कंघा आदि
की डिमांड मंगलवार को विभाग को भेज दी है। बताया कि 15 लीटर दूध ही लेने
का आदेश है।
साबुन, तेल, मंजन भी नहीं
गांव गांधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के
लिए स्टेशनरी नहीं है। साबुन, तेल, मंजन, तौलिया नहीं है। वार्डन संतोष
पाठक ने बताया कि वह अपने स्तर से साबुन, तेल, मंजन मंगवा रही हैं। विभाग
को 4 जुलाई को डिमांड और 14 जुलाई को रिमाइंडर भेजा। अभी तक सामग्री उपलब्ध
नहीं कराई गई है। बुधवार को बच्चों की किताबें विद्यालय में आ गईं।
पंजीकृत 100 में 87 बच्चे रह रहे हैं। बताया कि 13 मुस्लिम बच्चे ईद की
छुट्टी पर घर गए
हैं। अभी तक लौटे नहीं हैं। जनरेटर नहीं है। छोटा इनवर्टर
लगा है। इससे एक-दो सीएफएल ही मुश्किल से जलती हैं। बिजली भी बमुश्किल
चार-पांच घंटे आती है। इसके चलते भीषण गर्मी में बच्चों को दिक्कत होती है।
बताया कि पूर्व जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान जनरेटर और रेनपॉट टैंक
बनाने का आश्वासन दिया था। अभी न तो जनरेटर मिला और न ही रेनपॉट टैंक
बनवाया गया है। टीचर भी कम हैं। पार्टटाइम तीन और फुल टाइम सिर्फ एक टीचर
है।
वर्जन
कस्तूरबा गांधी स्कूलों में वार्डन की मांग के मुताबिक
सामग्री भेजी गई है। अगर कहीं दिक्कत है तो उसे दूर कराया जाएगा। साथ ही
ये भी देखा जाएगा जहां उपलब्धता है वहां क्यों दिक्कत आ रही है। कोई
गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - बीएसए योगराज
सिंह