फर्रुखाबाद। हर वर्ष गंगा और रामगंगा की बाढ़ से तबाही झेलने वाले जनपद के करीब 322 गांवों के लिए इस बार राहत की उम्मीद जगी है। वर्षों से कटान, विस्थापन और फसल बर्बादी का दर्द झेल रहे ग्रामीणों को अब करोड़ों की लागत से बने परकोपाइन और स्पर संरचनाओं का सहारा मिला है। सिंचाई विभाग ने 12.14 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत चारों बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं का कार्य पूरा कर लिया है।
जुलाई से सितंबर तक आने वाली बाढ़ हर साल हजारों बीघा उपजाऊ भूमि और दर्जनों मकानों को निगल जाती है। पिछले वर्ष 200 से अधिक मकान कटान की भेंट चढ़ गए थे और 186 परिवारों को मुआवजा दिया गया था। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मांग पर शासन ने कटान रोकने के लिए स्थायी उपायों को मंजूरी दी थी। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दुर्ण कुमार ने बताया कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है और इनसे कटान रोकने में मदद मिलेगी।
चारों परियोजनाओं का काम हुआ पूरा
बढ़पुर क्षेत्र के दिलीप की मड़ैया में 4.36 करोड़ रुपये से 1200 मीटर लंबा परकोपाइन स्पर तैयार किया गया है। अल्हादादपुर भटौली में 2.45 करोड़ रुपये की लागत से 360 मीटर कटान निरोधक संरचनाएं बनाई गई हैं। पैलानी दक्षिण, समैचीपुर चितार में 4 करोड़ रुपये की लागत से 1400 मीटर और कैलियाई में 1.33 करोड़ रुपये की लागत से 450 मीटर से 35 स्पर तैयार किए गए हैं।
पिछले साल की तबाही अब भी ताजा
पिछले वर्ष गंगा और रामगंगा के उफान ने अमृतपुर, शमसाबाद और बढ़पुर क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। 50 से अधिक गांव जलमग्न हो गए थे। सैकड़ों मकान ढह गए और हजारों बीघा धान, उड़द व तिल की फसलें नष्ट हो गई थीं। कई गांवों का संपर्क टूट गया था और लोगों को नावों के सहारे जीवनयापन करना पड़ा था।
पैलानी-दक्षिण में 45 घर और 300 बीघा जमीन निगल चुकी है गंगा
पैलानी दक्षिण और समैचीपुर चितार क्षेत्र के ग्रामीण वर्षों से कटान का दंश झेल रहे हैं। यहां अब तक 45 मकान और 300 बीघा कृषि भूमि गंगा में समा चुकी है। चार करोड़ रुपये की लागत से बने 26 स्पर और कैलियाई में 1.33 करोड़ रुपये से बने 9 स्पर अब ग्रामीणों के लिए सुरक्षा की नई उम्मीद बनकर खड़े हैं।
फोटो-3 दिलीप की मड़ैया में तैयार किए गए बाढ़ से कटाव रोकने की परियोजना को देखते अधिकारी। संवाद