शान-ओ-शौकत से निकला जुलूस-ए-अली
फर्रुखाबाद। अंजुमन गुलामाने अली की देखरेख में हजरत अली की यौम-ए-पैदाइश पर जुलूस-ए-अली पूरे शान-ओ-शौकत से निकाला गया। जुलूस में हर धर्म के लोगों ने हिस्सा लेकर कौमी एकता की मिसाल पेश की। जगह-जगह फूलों की वर्षा हुई। जहां-जहां से अली का जुलूस निकला वहां पूरे रास्ते इत्र और गुलाब की खुशबू से महक उठे।
शुक्रवार शाम करीब 5 बजे लाल दरवाजा स्थित वारसी मस्जिद से मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली, मौलाना फरहत अली जैदी, आफताब हुसैन, सूफी पप्पन मियां और नफीस हुसैन एडवोकेट ने जुलूस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे पहले यहां कुरान ख्वानी हुई और जश्न-ए-अली के मौके पर मिठाई बांटी गई। जुलूस में आए लोगों को पप्पन मियां ने सैनिटाइजर व मास्क वितरित किए।
जुलूस अपने रिवायती अंदाज में आगे बढ़ा। जुलूस के आगे घुड़सवार बच्चे और चौपहिया गाड़ी पर रखा नक्कारा पुराने जमाने की याद ताजा करा रहा था। जैसे-जैसे जुलूस आगे बढ़ा लोगों की भीड़ बढ़ती गई। सजे-धजे वाहनों पर मौला अली की शान में शायर अपने कलाम पेश कर रहे थे।
त्रिपोलिया चौक पर सभी राजनीतिक दल के लोगों ने मौला अली के जुलूस का फूलमालाओं से स्वागत किया। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्मों का संगम बनी कमेटी की गाड़ी आकर्षण का केंद्र रही। मौलाना फरहत अली जैदी ने कहा कि हजरत अली पैग़ंबरे इस्लाम के दामाद थे। उन्होंने इंसाफ पर आधारित समाज की स्थापना की थी।
व्यापारी नेता अरुण प्रकाश ददुआ ने कहा कि यह पावन पर्व हमें गंगा-जमुनी तहजीब कायम करने का पैगाम देता है। युवा व्यापारी नेता अंकुर श्रीवास्तव ने कहा कि हजरत अली के जन्मदिन पर भाईचारे की सीख मिलती है। धर्मगुरु गुरवचन सिंह ने कहा कि हम सभी एक ईश्वर के बंदे हैं।
इसलिए भेदभाव नहीं करना चाहिए। जुलूस घुमना, नेहरू रोड, पक्का पुल, रकाबगंज आदि मुख्यमार्गों से निकला। जुलूस का देर रात लालबाग स्थित दरगाह अब्बास में समापन हुआ। यहां मौलानाओं ने शानदार तकरीर की। सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। सैयद सलीम हैदर, संजीव मिश्र उर्फ बॉबी, संजय गर्ग, राशिद खान, अंबार अली, पुन्नी शुक्ला, खुर्शीद खान, रफी अहमद आदि लोग मौजूद रहे।