शहर के छपाई कारखानों से निकलने वाला पानी गंगा में मिलने से स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को चर्म रोग होने की संभावना बढ़ गई है।
शहर के पश्चिमी ओर स्थित लगभग 70 छपाई कारखानों से प्रतिदिन करीब एक लाख लीटर केमिकल युक्त पानी गंगा में बहाया जा रहा है। हालत यह है कि कारखाने से निकलने के बाद नालियों में बह रहा पानी चटक रंग लिए गंगा में प्रवाहित हो रहा है। स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चैप्टर चेयरमैन रोहित गोयल बताते हैं कि इंडस्ट्रीयल एरिया में लगे छपाई कारखानों में ईको फ्रेंडली कलर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इनका कहना है कि पश्चिमी ओर चल रहे 70 छपाई कारखानों में से सिर्फ 15 कारखानों में ही ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं। छपाई कारखानों के अलावा शहर से निकलने वाले गंदे पानी से गंगा बीमार होती जा रही हैं। इस बारे डाक्टर केएम द्विवेदी बताते हैं कि केमिकल युक्त पानी से स्नान करने पर खुजली, दाद आदि बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही गंगा के पानी में केमिकल घुलने से आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इससे पानी में रहने वाले जीव, जंतुओं के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।