फर्रुखाबाद। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में माघ माह में चल रहे मेला रामनगरिया के दौरान छपाई कारखानों को बंद रखने के आदेशों का पालन नहीं हो रहा। सोमवार को धूप खिलते ही कारखानों में कपड़े की धड़ल्ले से रंगाई और छपाई चलती रही। शहर में डेरा डाले कानपुर प्रदूषण विभाग की टीम जांच के नाम पर खानापूरी कर रही है।
माघ माह में गंगा के तटों पर 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर स्नान होगा। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में शासन ने प्रदूषित जल निकालने वाली इकाइयों को निर्धारित तारीखों पर बंद रखने के आदेश दिए हैं। इसी के तहत 18 से 20 और फिर 23 जनवरी को छपाई कारखानों को बंद रखने के निर्देश हैं। इसके बावजूद प्रदूषण विभाग की शह पर कारखानों में धड़ल्ले से कपड़ा छपाई और रंगाई का काम चल रहा है।
सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे लकूला गिहार बस्ती से चांदपुर जाने वाले मार्ग पर तीन छपाई कारखानों का जायजा लिया गया, तो वहां खुलेआम कपड़े की छपाई और रंगाई का काम चलता मिला। 20 से अधिक करीगर छपाई में लगे थे। छतों ही नहीं कारखाने के बाहर खाली मैदान में रंगने के बाद कपड़ा सुखाया भी जा रहा था। इससे गंगा जल प्रदूषित होने से इन्कार नहीं किया जा सकता। प्रदूषण विभाग के जेई दीपक कुमार ने बताया कि वह सुबह से जांच कर रहे हैं। इस समय एक अन्य विभागीय काम से आए हैं। यदि छपाई हो रही है तो वह जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।
-
डीएम ने 10 अफसरों की बनाई है अनुश्रवण समिति
शासन के प्रमुख सचिव के निर्देश पर डीएम ने 26 दिसंबर को आदेश जारी कर रंगीन पानी निकालने वाली इकाइयों पर निगरानी रखने के लिए 10 अफसरों की टीम बनाई थी। इनमें वन विभाग के डीएफओ, सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार सदर, उपायुक्त उद्योग, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक, बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता, प्रदूषण विभाग के सहायक पर्यावरण अभियंता व अवर अभियंता, जिला पंचायत राज अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका शामिल हैं। इन सभी अफसरों को बंदी के दिनों में निरीक्षण आख्या नियमित रूप से उपलब्ध कराना है।
फोटो-14 लकूला के पास एक कारखाने में छपाई करते कारीगर। संवाद