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Farrukhabad News: रसातल में भाव...शीतगृहों में सड़ रहा आलू

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फोटो-17 याकूतगंज के पास कानपुर रोड के किनारे तालाब में फेंका जा रहा सड़ा आलू। संवाद
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फर्रुखाबाद। आलू के कम भाव, धीमी निकासी से किसानों की बर्बादी देख अब शीतगृह संचालक भी चिंतित हैं। इन दिनों आलू बेचने पर सिर्फ निकासी का खर्च निकल पा रहा है। ज्यादातर किसानों ने निकालने के बजाय शीतगृहों में ही आलू छोड़ दिया है, जो अब सड़ने लगा है। उसे फेंका जा रहा है।
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आलू यहां की सबसे प्रमुख फसल है। करीब 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसका बंपर उत्पादन हुआ। जिले के 121 शीतगृहों में 10 लाख 71 हजार 964 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता है। इसके मुकाबले नौ लाख 72 हजार 812 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया। यह भंडारण गत वर्ष से 1.93 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
मंदी के चलते शीतगृहों से आलू की निकासी बेहद धीमी है। भंडारण के तीन माह बीतने के बावजूद उद्यान विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार महज 16.50 प्रतिशत आलू की निकासी हुई है। नवंबर में नया आलू बाजार में दस्तक देता है, इसमें अब चार माह ही शेष हैं। इन दिनों 300 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रति क्विंटल आलू बिक रहा है, जबकि भंडारण से लेकर छंटाई, पल्लेदारी आदि पर करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल खर्च आता है। इससे किसान की लागत डूबती दिख रही है। यदि आलू हरा, रोग से ग्रस्त व छोटा है तो उसके खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि शीतगृहों में आलू सड़ने लगा है और किसानों के न निकालने के कारण उसे फिंकवाया जा रहा है।
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दूसरे प्रांतों से नहीं आ रही मांग
सातनपुर मंडी के आढ़ती सुधीर वर्मा ने बताया कि गत वर्ष इन दिनों झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि स्थानों से आलू की मांग आने लगी थी। शीतगृहों से 25 से 30 प्रतिशत आलू की निकासी हो गई थी। इस वर्ष कहीं से भी मांग नहीं आई। उन्होंने बताया कि यदि किसान खोदाई के दौरान आलू बेचता तो 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल जाते। अब इससे अधिक भंडारण व निकासी का खर्च आ रहा है।


सड़क किनारे लगे आलू के ढेरकेस 1. फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव याकूतगंज के निकट कानपुर रोड किनारे तीन शीतगृह संचालित हैं। ज्ञानफोर्ट पब्लिक स्कूल के सामने तालाब में सड़क के किनारे आलू के ढेर लगे हैं। स्थानीय निवासी कल्लू, इमरान ने बताया कि शीतगृहों से ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर सड़ा आलू तालाब में व सड़क किनारे डाला जा रहा है। प्रतिदिन पांच से छह ट्रॉली आलू फेंका जा रहा है।

केस 2. सातनपुर मंडी रोड स्थित शीतगृह परिसर में 20 दिन पूर्व करीब 300 बोरी सड़ा आलू निकालकर फेंक दिया गया था। आलू की सड़ांध से स्कूली बच्चे भी परेशान थे। सड़ा आलू आबादी से दूर फिंकवाने की मांग जिलाधिकारी से भी की गई थी।

केस 3. मोहम्मदाबाद क्षेत्र में ताजपुर रोड पर कई ट्रॉली आलू फेंका गया है। वहां कई ट्रॉली कटा, दागी व सड़ा आलू पड़ा है।


लागत निकलना मुश्किलफोटो-18 सुनील कुमार सिंह।
किसान सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने शीतगृह में 1800 पैकेट आलू भंडारित किए हैं। इस बार आलू बहुत सस्ता बिक रहा है। आलू की प्रजाति न्यू हॉलैंड के भी दाम कम मिल पा रहे हैं। यदि भाव में सुधार न हुआ तो शीतगृह में ही आलू छोड़ना पड़ेगा।
फोटो-19 लवीश यादव।
किसान लवीश यादव ने बताया कि उन्होंने एक हजार पैकेट शीतगृह में रखे हैं। कुछ आलू निकालकर बेचा है। भाव की मंदी से आलू की लागत भी डूब रही है।







आलू निकालने से कतरा रहे किसानफोटो-20 पवन सिंह।
शीतगृह संचालक पवन सिंह का कहना है कि भाव की मंदी से व्यापारी भी कम आ रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता के आलू की बिक्री हो रही है, लेकिन रोग ग्रस्त व दागी आलू का कुछ नहीं मिल रहा है। इससे किसान शीतगृह से आलू निकालने में कतरा रहे हैं।
फोटो-21 विजय यादव।
शीतगृह मालिक विजय यादव ने बताया कि बमुश्किल पांच फीसदी ही आलू की निकासी हुई है। भाव की यही स्थिति रही ताे आलू फेंका जाना तय है। यदि निकासी नहीं हुई तो भंडारण पर होने वाला खर्च भी निकालना मुश्किल होगा।


गत वर्ष इन दिनों 20 से 22 प्रतिशत आलू की निकासी हो गई थी, जबकि इस वर्ष 16.50 प्रतिशत निकासी हुई है। भाव कम होने से निकासी धीमी है। शीतगृहों से सड़ा आलू फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- राघवेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

फोटो-17 याकूतगंज के पास कानपुर रोड के किनारे तालाब में फेंका जा रहा सड़ा आलू। संवाद

फोटो-17 याकूतगंज के पास कानपुर रोड के किनारे तालाब में फेंका जा रहा सड़ा आलू। संवाद

फोटो-17 याकूतगंज के पास कानपुर रोड के किनारे तालाब में फेंका जा रहा सड़ा आलू। संवाद

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