फोटो-2 रेलवे रोड स्थित दुकान पर घेवर बनाते कारीगर। संवाद
कायमगंज। हरियाली तीज से पहले सावन की सबसे पसंदीदा मिठाई घेवर भी महंगाई की चाशनी में डूब गया है। देसी घी, वनस्पति घी, चीनी, मैदा और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घेवर के दाम पर पड़ा है। पिछले साल के मुकाबले इस बार घेवर 100 रुपये प्रति किलो तक महंगा हो गया है।
15 अगस्त को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। विवाहित बेटियों और बहनों को सिंधारे में घेवर देने की परंपरा है। त्योहार नजदीक आते ही बाजार में घेवर की मांग बढ़ने लगी है लेकिन बढ़ी कीमतों ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है।
बाजार में इस समय देसी घी से तैयार रबड़ी घेवर 900 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि पिछले वर्ष इसकी कीमत 800 रुपये प्रति किलो थी। मावा घेवर 380 से 400 रुपये प्रति किलो और सादा घेवर 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। पिछले साल सादा घेवर करीब 200 रुपये प्रति किलो बिक रहा था।
दुर्गा घेवर भंडार के संचालक हिमांशु गुप्ता ने बताया कि देसी घी के 15 किलो के टीन की कीमत एक साल में 8,500 रुपये से बढ़कर 9,500 रुपये हो गई है। वहीं, वनस्पति घी का टीन तीन-चार महीने पहले 2,200 रुपये का था, जो अब 2,700 रुपये में मिल रहा है। अन्य कच्चे माल और ईंधन की लागत भी लगातार बढ़ी है।
मिठाई विक्रेता श्याम ने बताया कि मैदा 27 रुपये से बढ़कर 32 रुपये प्रति किलो, चीनी 42 रुपये से बढ़कर 50 रुपये प्रति किलो और कोयला 14 रुपये से बढ़कर 22 रुपये प्रति किलो हो गया है। रिफाइंड के दाम भी बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से कई दुकानों पर कोयले की भट्ठियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है।