फर्रुखाबाद। दो अक्तूबर तक चल रहे सेवा पखवाड़े में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार का नारा दिया गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग में ढाई माह से प्रसव पूर्व अल्ट्रासाउंड सेवा ठप चल रही है। इससे गर्भवती महिलाओं को दिक्कत हो रही है।
जनपद के किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने से जिले के 12 निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर निशुल्क जांच के लिए संबद्ध किए गए हैं। इन सेंटरों पर गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पहले अल्ट्रासाउंड जांच कराई जाती है। विभाग से प्रति अल्ट्रासाउंड 425 रुपये भुगतान किया जाता है। विभागीय जानकारी के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से जून तक निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर 4357 महिलाओं की जांच की गई।
इससे औसतन 1450 गर्भवती महिलाओं की प्रति माह अल्ट्रासाउंड जांच की जा रही है। जुलाई से पोर्टल अपडेट के पेच में अल्ट्रासाउंड सेवा पूरी तरह ठप हो गई। इन दिनों प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन काे 17 सितंबर से दो अक्तूबर तक सेवा पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें स्वस्थ नारी सशक्त परिवार का नारा देकर अभियान चल रहा है।
वहीं हकीकत यह है कि स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्थाओं के चलते महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। निजी स्तर पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 700 से 800 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। प्रसूताओं को अस्पताल से पोषण आहार का भी भुगतान नहीं हो रहा है। उन्हें जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। इससे स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान की पोल स्वास्थ्य विभाग ही खोल रहा है।
एसीएमओ डॉ.दलवीर सिंह ने बताया कि शासन स्तर से ही पोर्टल अपडेट किया जा रहा है। पोर्टल न चलने से गर्भवती महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पा रही है। पोर्टल चालू होने के बाद ही सेवाएं शुरू हो सकेंगी।