फर्रुखाबाद। आलू की मंदी से बाजार धड़ाम है। जिले में बाजार का रुख आलू के भाव तय करते हैं। आलू के उछाल से बाजार में रौनक रहती है। मंदी से बाजार सन्नाटे की हालत में आ जाता है। इस बार आलू पर मंदी की मार है। इन दिनों 400 रुपये क्विंटल आलू बिक रहा है। इससे किसानों को एक हजार रुपये से लेकर 2200 रुपये बीघा का नुकसान हो रहा है। इसका असर बाजार पर है। 35 से 50 फीसदी खरीददारी में गिरावट है।
ईंट-भट्ठा
ईंट की बिक्री तकरीबन 50 फीसदी प्रभावित हुई है। पहले आलू बेचने के लिए आने वाले ट्रैक्टरों में से 70 फीसदी ईंट लेकर जाते थे। यह नगद पैसे देेते थे। इसी से व्यापार चलता था। जिले में 120 ईंट-भट्ठे हैं। ईंट पथाई और पकाई का छह महीने काम चलता है। एक भट्ठे पर 30 हजार ईंट का रोज 6 महीने उत्पादन होता है। आलू की मंदी से पुराना स्टाक डंप है। पर्यावरण की औपचारिकताओं को लेकर इन दिनाेें काम बंद है।
नरायन अग्रवाल, कोषाध्यक्ष, जिला ईंट निर्माता संघ
सराफा
आलू किसान सराफा कारोबार की रीढ़ हैं। आलू की तेजी के दिनों में बाजार में चढ़ाव रहता है। मंदी से करीब 40 फीसदी के करीब गिरावट है। आर्डर देने वाले वापस नहीं आ रहे हैं। सहालग से पहले ही बड़े आर्डर मिलने लगते थे। इस बार ऐसा नहीं है। सहालग को लेकर इस बार 10 फीसदी भी आर्डर नहीं हैं। ऐसा ही सभी सराफा कारोबारियों के साथ है। आर्डर देने वाले उधार की डिमांड करते हैं। ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। जिले में करीब 500 सराफा दुकानें हैं। आलू की तेजी के दिनों में पांच किलो के करीब सोने का रोज कारोबार होता है।
सोनू गुप्ता, कोतवाली रोड फतेहगढ़
इलेक्ट्रानिक्स
इलेक्ट्रानिक्स कारोबार में भी मंदी छाई है। कारोबार सिमट कर 50 फ ीसदी पर आ गया है। इलेक्ट्रानिक्स आइटमाें की सबसे ज्यादा खरीदारी देहात में होती है। आलू की मंदी से किसान आ नहीं रहे हैं। पहले रोज बड़ी बिक्री होती थी। 15 से 20 हजार रुपये का कारोबार हो जाता था। इस बार मुश्किल है। सहालग को लेकर तगड़ा स्टाक किया था। इस सीजन में माल डंप होने की नौबत है। यह हाल पूरे बाजार का है। जिले में 50 के करीब इलेक्ट्रानिक्स की दुकानें हैं।
संजय कटियार, भोलेपुर
बर्तन
आलू की मंदी का असर बर्तन बाजार पर भी है। 50 फीसदी के करीब कारोबार प्रभावित हुआ है। जिले में 700 के करीब बर्तनों के बड़े कारोबारी हैं। आलू की तेजी के दौर में दुकानों पर भीड़ रहती थी। इस बार ऐसा नहीं है। तीन सालों से आलू पर मंदी है। इससे लगातार कारोबार गिर रहा है। इस साल सबसे बुरा हाल है। रोज हजार रुपये का भी कारोबार नहीं हो रहा है। बाकी दुकानदार भी परेशान हैं।
अभिषेक गुप्ता, फतेहगढ़
कपड़ा
कपड़ा बाजार पर आलू की मंदी और सर्दी न होने का भी असर है। देहात से खरीददार नहीं आ रहे हैं। इससे शहर में भी डिमांड कम है। नौकरी करने वालों की वजह से धंधा चल रहा है। कारोबार 50 फीसदी भी नहीं रह गया है। सर्दी ने होने से स्टाक डंप है। इससे लागत का भी निकलना मुश्किल लग रहा है। - अरशद खान, कोतवाली रोड