फर्रुखाबाद/कमालगंज। किसानों की किस्मत चमकाने वाला आलू इस बार उनकी बर्बादी का सबब बन गया है। भाव बढ़ने की उम्मीद में छायादार स्थानों पर ढेर लगाकर रखे गए आलू का करीब 30 फीसदी हिस्सा गर्मी के कारण खराब हो गया है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 200 रुपये तक का घाटा उठाना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। अब किसानों की उम्मीदें भी हताशा में डूब गईं।
किसानों ने खोदाई के समय आलू के कम भाव मिलने के कारण बड़ी संख्या में फसल को ढेर लगाकर रखा था। उन्हें उम्मीद थी कि भाव बढ़ेंगे, लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ ही ढेर खोलने पर आलू सड़ने लगा। खोदाई के समय 530 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला आलू अब 330 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। इस तरह प्रति क्विंटल 200 रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। सूखने और सड़ने से आलू का वजन भी कम हो गया है, जिससे किसानों को दोहरा नुकसान हो रहा है। कमालगंज के किसान मकरंद सिंह ने बताया कि पिछले बीस सालों में इतनी मंदी कभी नहीं देखी। इस बार 20 फीसदी आलू के ढेर ज्यादा लगाए गए थे, भाव बढ़ने की उम्मीद में।
किसानों को आशा थी कि बाजार में आलू के भाव में कुछ वृद्धि होगी। हालांकि, तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से ढेर में रखा आलू तेजी से खराब होने लगा। पुखराज और ख्याति जैसी हाइब्रिड किस्में ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जबकि चिपसोना किस्म भी सड़ रही है। करीब 30 फीसदी आलू सूखने और सड़ने से खराब हो गया, जिससे किसानों की उम्मीदें हताशा में बदल गईं।
लागत निकालना भी मुश्किल
आलू की गुणवत्ता खराब होने और भाव गिरने से किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसान मनोहर ने बताया कि 50 पैकेट के ढेर में से केवल 37 पैकेट आलू ही सही निकला। उन्हें आलू खोदाई की मजदूरी भी नहीं मिल पाई है। मनोहर ने पायल गिरवी रखकर मक्का का बीज खरीदा है, जिससे उनकी जेब खाली हो गई है। यह स्थिति कई किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
आलू में एक लाख रुपये का घाटा, बेटी की शादी पर संकट
शमसाबाद। ब्लाक के नैगंवा गांव निवासी किसान राधे ने बताया कि उन्होंने सात बीघा खेत में पुखराज आलू की खेती की थी। उन्होंने 300 पैकेट आलू का ढेर लगाया था। यह आलू 165.50 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से बिका, जो प्रति क्विंटल 331 रुपये की दर बैठती है। सूख और खराब आलू निकालने के बाद उन्हें अपनी फसल से केवल 30 हजार रुपये की आय हुई। जबकि इस फसल पर उनकी कुल लागत 1 लाख 30 हजार रुपये आई थी। इस प्रकार, उन्हें सीधे एक लाख रुपये का नुकसान हुआ है। परिवार की मेहनत का हिसाब इसमें शामिल नहीं है। गांव में कुल 500 आलू के ढेर लगे थे, जिनमें से राधे का यह ढेर भी शामिल था। उनकी बेटी दुर्गा की शादी 19 जून को तय है। कहा, अब शादी कैसे होगी, कहां से आएगा शादी का खर्चा। यह समझ में नहीं आ रहा है। (संवाद)
फोटो-14 कमालगंज के मिर्जा नगला गांव में लगे आलू के ढेर को साफ करते किसान। संवाद- फोटो : नगर निगम में धरने पर बैठे पार्षद एव लक्ष्मीनगर के लोग। संवाद
फोटो-14 कमालगंज के मिर्जा नगला गांव में लगे आलू के ढेर को साफ करते किसान। संवाद- फोटो : नगर निगम में धरने पर बैठे पार्षद एव लक्ष्मीनगर के लोग। संवाद