फोटो-14, नाव से बाइकें और साइकिल लेकर आते लोग। संवाद
फर्रुखाबाद/कमालगंज। हजारा नहर से विभिन्न जनपदों में खेतों की सिंचाई शुरू होने की उम्मीद से पांटून पुल बनने की आस भी जुड़ गई है। इस समय गंगा की चौड़ाई अधिक है। इतनी चौड़ाई में पांटून पुल बनाने के लिए न तो पांटून हैं और न ही स्लीपर।
फिलहाल पानी कम होने का इंतजार किया जा रहा है। कमालगंज-हरदोई मार्ग पर गंगा नदी के महमदगंज मड़ैयन घाट में पांटून पुल बनने में करीब एक माह की देरी हो चुकी है। पुल तैयार करने वाले कारीगरों का कहना है कि इस समय गंगा नदी के पानी की धार 250 से 270 मीटर की चौड़ाई में बह रही है। जबकि हर साल अधिकतम 15 जोड़ी पांटून का पुल तैयार होता है।
इसमें करीब 150 से 160 मीटर दूरी ही होती है। इतनी दूरी के लिए ही स्लीपर, गाटर व अन्य सामान उपलब्ध है। दूरी अधिक और पांटून-पटले कम होने के कारण पुल का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
गंगा में पानी कम होने पर ही पुल बन सकेगा। कारीगरों का मानना है कि हजारा नहर गंगा के नरौरा बांध से जुड़ी है। इससे अलीगढ़, कासगंज, मैनपुरी सहित कई जिलों में खेतों में सिंचाई होती है। रबी की फसलों की बोआई हुई है। नहर से फसलों की सिंचाई तेज होने पर गंगा में बढ़े चल रहे पानी का उपयोग नहर से सिंचाई में होने लगेगा। इससे गंगा में पानी घटेगा और पुल बनने का रास्ता साफ हो सकता है।
पहली बार नवंबर में इतना अधिक पानी
गंगापार के खुटिया निवासी राधाकृष्ण त्रिवेदी का कहना है कि अमूमन दीपावली होते ही गंगा में जलस्तर कम होकर कमर के आसपास तक हो जाता था। वह लोग बिना पुल व नाव के गंगा पार कर कमालगंज का बाजार करते थे। लेकिन इस बार 15 नवंबर तक भी पानी नहीं घटा। पानी कम हो और पांटून पुल जल्दी से जल्दी बन जाए तो लोगों को आवागमन की सुविधा मिल सके।