फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खेल के मैदान सिमटने से बच्चों की नाजुक आंखें हो रहीं बीमार

Mon, 31 Aug 2015 11:12 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर में खेलने-कूदने के लिए पर्याप्त मैदान न होने सेे बच्चे मनोरंजन के नाम पर अधिकतर समय टेलीविजन देखने में बिता रहे हैं। इसका बुरा असर इनकी नाजुक आंखों को समय से पहले ही बीमार कर रहा है। फलस्वरूप बच्चों में आईस्ट्रेन बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते अधिकतर बच्चे छोटी सी उम्र में चश्मा लगाने को मजबूर हो रहे हैं। शहर में जो
विज्ञापन


चुनिंदा मैदान हैं भी उनमें गंदगी फैली है। जानवर भी बांधे जा रहे हैं। जिला प्रशासन मैदानों की दुर्दशा सुधारने में कोई दिलचस्पी भी नहीं दिखा रहा है। शहर में खेलने के लिए डीपीवीपी फील्ड, बजरिया फील्ड, क्रिश्चियन कालेज ग्राउंड और पटेल पार्क हैं। इसके अलावा और भी छोटे-छोटे पार्क हैं लेकिन अधिकतर में गंदगी फैली है। पटेल पार्क में तो खेलने लायक जगह

ही नहीं है। चारों ओर बड़ी-बड़ी घास खड़ी है। आवारा जानवर पूरे दिन पार्क में विचरण करते हैं। डीपीवीपी और बजरिया फील्ड में भी गंदगी का अंबार है। बजरिया फील्ड के आसपास रहने वाले लोग मैदान में जानवर बांधते हैं। कूड़ा भी डाला जाता है। मैदानों और पार्कों की दशा बदहाल होने से बच्चे क्रिकेट, फुटबाल या फिर अन्य कोई खेल नहीं खेल पाते हैं।
विज्ञापन


नतीजतन बच्चे मनोरंजन के नाम पर ज्यादातर समय टेलीविजन देखते या फिर कंप्यूटर व मोबाइल पर गेम खेलते हैं। इससे बच्चों की आंखों पर जोर पड़ता है। इससे समय से पहले ही इनकी आंखें बीमार और कमजोर हो रही हैं। टेलीविजन अधिक देखने से बच्चे आईस्ट्रेन की चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते बच्चे समय से पहले ही चश्मा लगाने को मजबूर हैं।

लगातार इलेक्ट्रानिक उपकरणों पर नजर जमाए रहने से आंखों में लालपन, आंख से पानी आना, जलन और खुजली जैसी शिकायतें भी आम हो रही हैं। इसके अलावा बच्चों को बढ़ने के लिए स्वस्थ वातावरण और खुली हवा भी नहीं मिल पा रही। इस सबके बावजूद संबंधित अधिकारी पार्कों की अव्यवस्था पर उदासीन बने हुए हैं।

क्या कहते नेत्र चिकित्सक  
नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. टी.दत्ता कहते हैं कि देर तक टेलीविजन देखने और कंप्यूटर के प्रयोग से ज्यादातर बच्चों में आईस्ट्रेन बीमारी फैल रही है। अधिक टीवी देखने से आंखों में जलन, लालामी, नींद न आना, आंसू निकलने जैसी समस्या हो जाती है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को टेलीविजन काफी कम देखने दें। साथ ही कंप्यूटर और मोबाइल का प्रयोग भी सीमित समय के लिए ही करने दें। कोशिश करें कि बच्चे पढ़ाई-लिखाई से थकने के बाद खुली और स्वच्छ हवा में खेलें कूदें। इससे उनका शारीरिक विकास सही तरीके से होगा।

डा. अमित दीक्षित कहते हैं कि खेल का मैदान न होने से बच्चे  टेलीविजन लगातार बैठकर देखते है। इससे सिर में दर्द, चक्कर आना और पेट के रोग बढ़ने की आशंका रहती है। अगर बच्चों को खुले मैदान में खेलने को नहीं मिलता है तो उनके शरीर में ग्रोथ नहीं होता है। फिर भी जितना हो सके अभिभावक बच्चों को खुले में खेले जाने वाले खेल खेलने को प्रेरित करें। साथ ही आंखों के थकने पर हरियाली देखने को कहें। इससे आंखों को आराम मिलता है।
विज्ञापन


ये बरतें एहतियात
- टेलीविजन के कलर सामान्य रखें।
करीब चार-पांच फीट की दूरी से टेलीविजन देखें।
लगातार बैठकर टेलीविजन न देखें। इलेक्ट्रानिक उपकरणों का प्रयोग जरूरत भर ही करें।
समय-समय पर नेत्र रोग विशेषज्ञ से आंखों की जांच करवाते रहें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें