फर्रुखाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा दावा नो क्लेम किए जाने को सेवा में कमी मानते हुए फैसला सुनाया। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह परिवादिनी को वाहन मरम्मत में खर्च हुई राशि 1.65 लाख रुपये परिवाद दायर करने की तिथि से 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे।
अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्य नाजरीन बेगम और विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ के समक्ष कोतवाली कायमगंज के मोहल्ला कुकीखेल निवासी नारायन देवी ने एक बीमा कंपनी के मंडलीय और शाखा प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दाखिल किया। दायर किए गए परिवाद में नारायन देवी ने कहा कि उन्होंने अपने वाहन का बीमा कराया था। उसकी वैधता 17 जुलाई 2013 से 16 जुलाई 2014 तक थी। 25 नवंबर 2013 को वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें लगभग 1.65 लाख रुपये की मरम्मत करानी पड़ी।
बीमा कंपनी ने ड्राइविंग लाइसेंस को अमान्य बताते हुए दावा निरस्त कर दिया। आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद था। लाइसेंस शुल्क कैशबुक में जमा न होने को आयोग ने परिवहन विभाग की प्रशासनिक चूक माना और इसके लिए लाइसेंस धारक को जिम्मेदार नहीं ठहराया। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर बीमा दावा खारिज करना न्यायोचित नहीं है।
आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 45 दिन के भीतर परिवादिनी को 1.65 लाख रुपये 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित तथा 5 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करे। आदेश का पालन न होने पर देय राशि पर 10 प्रतिशत ब्याज देना होगा।