फोटो-23 ओपीडी में चेस्ट फिजीशियन के बाहर फर्स पर बैठे मरीज। संवाद
फर्रुखाबाद। लोहिया पुरुष अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और उनका समय से न आना मरीजों के लिए मुसीबत बन गया है। सोमवार को ओपीडी में पंजीकरण से लेकर पर्चा काउंटर तक लंबी कतारें लगीं। कई बार धक्का-मुक्की हुई।
आर्थो डॉक्टर दिव्यांग बोर्ड जाने से हड्डी के मरीजों को दवा न मिली। चेस्ट फिजीशियन की लेटलतीफी भी मरीजों के लिए मुसीबत बनी। दोपहर 12 बजे के बाद पहुंचे ईएनटी के मरीज भी बिना दवा लिए लौट गए।
लोहिया अस्पताल में इन दिनों रिकॉर्ड में हड्डी रोग का कोई डॉक्टर तैनात नहीं है। मगर ईएमओ के पद पर तैनात आर्थो सर्जन डॉ. रिषिकांत वर्मा मरीजों को देखते हैं। सोमवार को दिव्यांग बोर्ड में ड्यूटी के चलते ओपीडी में नहीं आए। लिहाजा आने वाले हड्डी के 200 मरीज दर्द से कराहते हुए लौटे। ईएनटी सर्जन डॉ. नवनीत कुमार ने दोपहर 12 बजे तक मरीज देखे। इसके बाद पहुंचे मरीज बिना इलाज लौट गए।
टीबी एवं चेस्ट फिजीशियन डॉ. ध्रुवराज के कमरे के बाहर मरीज थक हार कर फर्श पर ही बैठ गए। दोपहर 12 बजे तक डॉक्टर न पहुंचने से मरीजों को खासी दिक्कतें हुईं। मरीजों को कमरे में कोई कर्मचारी भी नहीं मिला। कुछ लोगों राउंड पर होने की बात बता दी। पर्चा काउंटर पर भी धक्का-मुक्की होती रही। सबसे अधिक भीड़ सर्जन डॉ. रोहित तिवारी के कमरे के बाहर रही। लोग पर्चा जमा करने में मशक्कत करते दिखे।
सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के चलते दिक्कत आ रही है। राउंड पर जाकर भर्ती मरीजों को देखने में भी समय लगता है। इसलिए भी कुछ देरी होती है। उनकी कोशिश है, हर मरीज को दवा मिले। डॉक्टरों की कमी को लेकर रिपोर्ट भेज चुके हैं।