मास्क-सैनिटाइजर खरीद में घपले की जांच को अभिलेख कब्जे में लिए
फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए जनप्रतिनिधियों की निधि से मास्क व सैनिटाइजर की खरीद में जमकर मनमानी की गई। जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच कमेटी ने सोमवार को सीएमओ कार्यालय परिसर स्थित स्टोर पहुंचकर अभिलेख कब्जे में लिए। हालांकि स्टोर से कई बिल उपलब्ध नहीं कराए गए।
कोरोना महामारी से बचाव के लिए सांसद व विधायकों ने स्वास्थ्य विभाग को अपनी निधि से एक करोड़ 45 लाख रुपये दिए थे। स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों के खेल के चलते मार्च में इस रकम से हुई मास्क व सैनिटाइजर की खरीद में लाखों के वारेन्यारे किए गये। बिना टेंडर व वर्क आर्डर के फुटकर से भी महंगी दरों पर थोक में खरीद दिखाई गई है। इसकी शिकायत पर जिलाधिकारी ने 15 जून को जांच के लिए वरिष्ठ कोषाधिकारी, अतिरिक्त एसडीएम व सीएमएस की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी।
पता चला है कि खरीद संबंधी बिलों में भी हेराफेेरी का प्रयास चल रहा है। मार्च में मास्क व सैनिटाइजर की आपूर्ति से पहले ही लखनऊ की फर्म ने बिल भेज दिए थे। इस खेल से पर्दा उठा तो संलिप्त कर्मचारी बचने को लीपापोती का प्रयास कर रहे हैं। सोमवार को वरिष्ठ कोषाधिकारी व अतिरिक्त एसडीएम सुनील कुमार यादव जांच करने स्टोर पहुंचे।
उन्होंने खरीद व वितरण संबंधी अभिलेख कब्जे में ले लिए हैं। कोषाधिकारी अतुल तिवारी ने बताया कि जांच लगभग अंतिम दौर में है। बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। हालांकि खरीद संबंधी अभी पूरे बिल उपलब्ध नहीं कराए गए। कुछ बिल भेजे जाने का आश्वासन दिया गया है। शीघ्र ही जांच पूरी कर आख्या जिलाधिकारी को दे दी जाएगी।