फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग में खरीद के खेल के चलते करोड़ों रुपये के संसाधन मरीजों के काम नहीं आ रहे हैं। आक्सीजन प्लांट व वेंटिलेटर का तो मरीजों पर ट्रायल तक नहीं किया गया। वहीं, हेल्थ एटीएम के चालू होने से पहले वारंटी खत्म हो चुकी है।
कोरोना महामारी के बाद जिले की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए शासन से करोड़ों रुपये के संसाधन दिए गए। ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की जान न जाए, इसके लिए लोहिया अस्पताल, सीएचसी फतेहगढ़, कमालगंज, मोहम्मदाबाद, बरौन व राजेपुर में ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए। एक ऑक्सीजन प्लांट लगाने में करीब 40 लाख रुपये खर्च हुए।
इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के एक-एक वार्ड में बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लाइन डाली गई। तीन वर्ष में किसी भी सीएचसी में प्लांट से एक मरीज को भी ऑक्सीजन नहीं दी। महामारी के दौरान 100 बेड का एल-2 अस्पताल बनाया गया फतेहगढ़ सीएचसी में पांच वेंटीलेटर खरीदकर रखे गए। इससे गंभीर मरीजों को रेफर करने के बजाए अस्पताल में ही समय इलाज देकर उसकी जान बचाई जा सके।
यहां गंभीर मरीज तो दूर की बात ओपीडी सेवा तक सीमित अस्पताल में साधारण मरीज भी भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। वहीं लोहिया अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट भी खराब होने पर हफ्तों बंद रहता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगे हेल्थ एटीएम जांच के नाम पर वजन व बीपी नापने तक सीमित हैं।
वहीं, नवाबगंज व राजेपुर क्षेत्र के अधिकांश पीएचसी में हेल्थ एटीएम रखने के बाद दो वर्ष से चालू तक नहीं किए गए। इससे इन हेल्थ एटीएम की वारंटी भी खत्म हो चुकी है। अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 40 से 65 लाख रुपये की लागत से बीपीएचयू का निर्माण हो रहा है। कुछ में तैयार हो चुके हैं, जबकि कुछ का निर्माण चल रहा है। उद्देश्य यह है आधुनिक जांच उपकरणों से लैस इस बीपीएचयू में गंभीर मरीजों की भी सभी जांचें हो सकें। अधिकारियों के लापरवाह रवैया के चलते यह सपना पूरा होने में भी संदेह हो रहा है।
वर्जन
जिम्मेदार बोले-कमियां दुरुस्त कराई जा रहीं
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि कुछ स्थानों पर जो कमियां है उन्हें दुरुस्त करवा कर व्यवस्था को सुधारने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है।