फर्रुखाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर लाखों रुपये कीमत के लगे ऑक्सीजन प्लांट सीएचसी प्रभारियों की मनमानी से फेल हैं। यह मरीजों को सांस नहीं दे पा रहे हैं जबकि डेढ़ गुनी कीमत पर ऑक्सीजन सिलिंडर खरीद का खेल चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से संसाधनों का दुरुपयोग होता दिख रहा है।
कोरोना महामारी से सबक लेकर सरकार ने जिला अस्पताल के साथ पांच सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट लगवा दिए। इसके अलावा सभी सीएचसी में जंबो व छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था की गई। ऐसे में नवाबगंज सीएचसी में मंगलवार को ऑक्सीजन न मिलने से मरीज की मौत हो गई।
वहीं, हकीकत यह है कि सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट लगा होने के बावजूद डेढ़ गुनी कीमत पर सिलिंडर खरीदे जा रहे है। आमतौर पर छोटा ऑक्सीजन सिलिंडर 150 रुपये और जंबो सिलिंडर 400 रुपये का मिलता है। सीएचसी में जंबो सिलिंडर 600 से 700 रुपये में और छोटा ऑक्सीजन सिलिंडर 250 से 300 रुपये में खरीदा जा रहा है।
फतेहगढ़ सीएचसी : एक माह में 23 मरीज भर्ती : सीएमओ कार्यालय के पास फतेहगढ़ सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट लगा है। प्लांट से 20 बेड के वार्ड तक पाइप लाइन डालकर ऑक्सीजन की सीधी सप्लाई है। यहां गंभीर मरीजों के लिए पांच वेंटीलेटर हैं।
75 बेड के इस अस्पताल परिसर में 20 बेड का अतिरिक्त वार्ड भी बना है। अक्सर ऑक्सीजन प्लांट परं ताला लगा रहता है। हालांकि बुधवार को ऑक्सीजन प्लांट का गेट खुला मिला। वहां मौजूद कर्मचारी ने बताया कि बिजली नहीं है। खास बात तो यह है कि यहां मरीज भर्ती ही नहीं किए जाते। एक माह में 23 मरीजों को दो से तीन घंटे के लिए भर्ती दिखाया गया है। गंभीर मरीज भर्ती ही नहीं किए जाते, इससे ऑक्सीजन की जरूरत ही नहीं है।
सीएचसी कमालगंज : प्लांट से ऑक्सीजन आने में लगते 20 मिनट : सीएचसी कमालगंज में लगा ऑक्सीजन प्लांट भी किसी मरीज को सांस नहीं दे रहा है। सीएचसी प्रभारी डॉ.अजय कुमार का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान दो वार्डों में पाइप लाइन डलवाकर ऑक्सीजन व्यवस्था कराई गई। वह वार्ड इमरजेंसी से कुछ दूरी पर हैं।
प्लांट से ऑक्सीजन आने में 20 मिनट लग जाते हैं। तब तक मरीज को सिलिंडर से ऑक्सीजन देकर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। एक माह में एक जंबो सिलिंडर ही खर्च हो पाता है। प्रसव कक्ष में जरूरत के अनुसार सिलिंडर या कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन दी जाती है। इस माह सांस के 10 मरीज आए थे।