फर्रुखाबाद। कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से अपनों को खोने वाले लोग सरकार के आंकड़ेबाजी से और आहत हो गए हैं। वह सरकारी व्यवस्था को कोस रहे हैं। उनका कहना है ऑक्सीजन की कमी से यदि किसी की मौत नहीं हुई है तो उनका दर्द भी झूठा ही होगा।
ऑक्सीजन की क्या कीमत है, इसका कोरोना की दूसरी लहर ने हर किसी को अहसास करा दिया। अप्रैल व मई में महामारी का कहर इस कदर बढ़ा कि संक्रमण की चपेट में आने वाले ज्यादातर लोगों में ऑक्सीजन लेवल घट गया। इलाज के दौरान अधिकतर मरीजों को समय से ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पाई और परिजन उन्हें हमेशा के लिए खो बैठे। सरकारी आंकड़ों में ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत न होने की बात सामने आई तो पीड़ित परिजनों का दर्द छलक पड़ा।
केस-1- बढ़पुर ब्लाक क्षेत्र के गांव बुढ़नामऊ निवासी विनोद कटियार की कोरोना की चपेट में आकर सात मई को मौत हो गई थी। इंटर कालेज में शिक्षिका बेटी कल्पना कटियार ने बताया कि छह मई को पिता को एल-2 अस्पताल फतेहगढ़ में भर्ती कराया था। सांस लेने में परेशानी होने पर अस्पताल में ऑक्सीजन दी गई। दो-तीन घंटे बाद ही सिलिंडर खत्म हो गया। डॉक्टर ने ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए कहा। जिले में कहीं भी सिलिंडर न मिल पाने से सात मई को पिता की मौत हो गई। इसके अलावा उनके जेठ कायमगंज के गांव कुबेरपुर निवासी गजेंद्र गंगवार भी कोरोना की चपेट में आ गए थे। जिले में ऑक्सीजन न मिल पाने से 12 मई को उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। तीन जून को उनकी भी मौत हो गई। कल्पना का कहना है कि सरकार कुछ भी कहे, जिन लोगों ने अपनों को खोया है, वहीं दर्द महसूस कर सकते हैं।
केस-2- कायमगंज क्षेत्र के गांव घसिया चिलौली निवासी संजय पाठक ने बताया कि उनके पिता भैंसज्य पाठक (73) सेवानिवृत्त शिक्षक थे। दो मई को तबीयत बिगड़ने पर उनका सीटी स्कैन कराया। सांस फूलने पर उन्हें कमालगंज के एल-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया। ऑक्सीजन की कमी होने पर 13 हजार रुपये में सिलिंडर खरीदा। सात मई को उनकी मौत हो गई। तीन मई को मां ऊषा पाठक की हालत बिगड़ गई। कायमगंज एल-2 अस्पताल में छह मई को उनकी भी मौत हो गई।
केस-3- कायमगंज के गांव सलेमपुर दूदेमई निवासी तस्लीम उर्फ कक्कू ने बताया कि पिता कदीर खां बीमार चल रहे थे। छह मई को उनकी सांस फूलने लगी। ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए खासी दौड़भाग की, लेकिन कहीं भी इंतजाम नहीं हो सका। इसके बाद अगले दिन रात को कमालगंज से 14 हजार रुपये में एक सिलिंडर की व्यवस्था की। ऑक्सीजन मिल जाने से पिता को काफी राहत मिली और वह स्वस्थ हो गए।
केस-4- कायमगंज के मोहल्ला पटवन गली निवासी अर्जुन बताते हैं कि उनकी 33 वर्षीय भाभी रेखा देवी मई की शुरुआत में बीमार हो गईं थीं। परिजन उन्हें सीएचसी ले गए। उन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी, लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई व्यवस्था नहीं थी। सीएचसी में भी डॉक्टर ने इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए और अन्य जगह के लिए रेफर कर दिया गया। तीन दिन बाद घर पर ही ऑक्सीजन के अभाव में भाभी की मौत हो गई।
केस-5- मोहम्मदाबाद के मोहल्ला शिवाजीनगर निवासी रियाज मोहम्मद ने बताया कि पत्नी अंसार बेगम की 26 अप्रैल को तबियत बिगड़ गई। कस्बे के एक निजी अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर ने ऑक्सीजन स्तर कम बताकर रेफर कर दिया। फर्रुखाबाद ले गए तो नर्सिंगहोम में ऑक्सीजन न होने पर भर्ती ही नहीं किया गया। लोहिया अस्पताल में भी डॉक्टर ने ऑक्सीजन न होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया। वह पत्नी को आवास विकास स्थित नर्सिंगहोम ले गए। यहां डॉक्टर ने ऑक्सीजन सिलिंडर का इंतजाम करने को कहा। सिलिंडर की व्यवस्था न हो पाने से पत्नी ने आखिरकार दम तोड़ दिया।
केस-6- मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव बहादुरगंज निवासी रामविलास यादव ने बताया कि उनकी पत्नी शिवकांती की 20 अप्रैल को तबियत बिगड़ गई। इस पर वह उन्हें लोहिया अस्पताल ले गए। भर्ती करने के बाद जांच की गई तो ऑक्सीजन लेवल कम मिला। रामविलास का कहना है कि समय रहते ऑक्सीजन सिलिंडर का इंतजाम हो जाता तो पत्नी की जान बच सकती थी। अस्पताल में ऑक्सीजन न मिल पाने से पत्नी की मौत हो गई।