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हवन, पूजन से मेला रामनगरिया का श्रीगणेश

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राम नगरिया मेला के शुभारंभ पर दीपों से आरती मां गंगा लिखते श्रृद्घालु। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। पौष माह की पूर्णिमा पर गुरुवार को आहुतियों के साथ मेला रामनगरिया का शुभारंभ हो गया। डीएम, एसपी और सीडीओ ने दीपदान किया। मां गंगा की आरती के साथ 21 हजार दीपों से उनका शृंगार किया गया।
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डीएम मानवेंद्र सिंह, एसपी अशोक कुमार मीणा और सीडीओ डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने पूर्व विधायक स्व. महरम सिंह के नाम से बने द्वार का फीता काटकर मेला रामनगरिया का उद्घाटन किया।
स्कूली छात्र बैंड बजाते हुए अधिकारियों को प्रशासनिक पंडाल तक ले गए। वहां पं. शिवकुमार शास्त्री ने हवन पूजन कराया। अधिकारियों ने यज्ञ में आहुतियां दीं। इसके बाद गंगा मां का पूजन किया गया। फूलों से सजी नाव में बैठकर अधिकारियों ने दीपदान किया। इसके बाद अधिकारी आरती स्थल पर पहुंचे। वहां वाराणसी से आए महंतों सीताराम, निरंजन झा, कृष्णकांत पांडेय, जय पांडेय और प्रदीप नारायण शुक्ला ने मां गंगा की आरती की। 21 हजार दीपों से मां गंगा लिखा गया। साधु-संत के साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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फूलमाला पहनाकर किया संतों का स्वागत
मेला प्रबंधक संदीप दीक्षित ने यज्ञ स्थल पर पहुंचे तमाम संतों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया। तमाम भक्तों ने संतों से आशीर्वाद भी लिया।
आसमान में उड़े सतरंगी गुब्बारे
उद्घाटन के बाद अधिकारियों ने हजारों की संख्या में शतरंगी गुब्बारे आसमान में उड़ाए। इससे आसमान का दृश्य काफी सुंदर हो गया। मेले में मौजूद बच्चों से लेकर बड़ों तक की नजरें आसमान की ओर ही थीं।
पीलीभीत की आतिशबाजी की रही शान
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अध्यक्ष सत्यवीर महाराज पीलीभीत से आतिशबाजी लेकर यहां पहुंचे। उन्होंने आतिशबाजी का आयोजन किया। इस भव्य दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
न सामाजिक दूरी और न दिखा मास्क
मेले के उद्घाटन से लेकर यज्ञ और आरती स्थल पर भी सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो सका। अफसरों के सामने ही लोग धक्कामुक्की तक करते नजर आए। यही नहीं बिना मास्क लगाए लोगों की संख्या काफी ज्यादा रहा।
हर-हर गंगे उद्घोष के साथ लगाई गंगा में डुबकी
फर्रुखाबाद। पौष पूर्णिमा पर पांचालघाट गंगा तट पर सुबह चार बजे से ही हर-हर गंगे के उद्घोष गूंजने लगे। बर्फीली हवाओं के बावजूद कल्पवासी गंगा स्नान करते रहे। स्नान का दौर देर शाम तक चलता रहा। भक्तों ने सत्यनारायण कथा और मुंडन संस्कार भी कराए। दान देकर पुण्य फल अर्जित किया।
पीलीभीत, शाहजहांपुर, हरदोई, मैनपुरी, इटावा, लखीमपुर आदि दूरदराज से आए लोगों ने भोर से ही स्नान शुरू कर दिया।
कई दिनों से गंगा के किनारे कल्पवास किए भक्तों ने स्नान के बाद दान किया। पूरा मेला परिसर संकीर्तन से गूंज उठा। कई स्थानों पर श्रीराम कथा और भागवत महापुराण का शुभारंभ हो गया। संतों के आश्रमों में भी रौनक लौट आई। सर्दी की वजह से हर साल से गंगा भक्तों की संख्या काफी कम रही।
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