अमृतपुर। गंगा के जलस्तर में गिरावट न होने से गांवों के अंदर घरों में भरे पानी से ईंधन भीगने और राशन समाप्त होने से अब पेट भरने को भी लाले पड़ने लगे हैं। घर के अंदर पानी भरने से किसी ने सड़क किनारे तो किसी ने ट्रैक्टर ट्राली पर पॉलिथीन तान कर अशियाना बना लिया है। वहीं इधर-उधर से ईंधन की व्यवस्था कर भोजन पकाते हैं। प्रशासन ने अभी तक बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में राहत सामग्री नहीं बांटी। स्वास्थ्य टीमों के गांवों में न जाने से खांसी, बुखार व खुजली से बीमार ग्रामीण बेहाल है।
शनिवार को रामगंगा का जलस्तर 135.45 से घटकर 135.30 मीटर पर आ गया। इसमें 49204 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गंगा के जलस्तर में कोई गिरावट नहीं हुई है। इस कारण पानी 136.90 मीटर पर है। इसमें 1 लाख 75 हजार 989 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंगा का जलस्तर न घटने से गांव हरसिंहपुर कायस्थ, कुड़री सारंगपुर, ऊगरपुर, जोगराजपुर, आशा की मड़ैया, तीसराम की मड़ैया, करनपुर घाट, कालिका नगला, राम प्रसाद नगला, भुड्डन की मड़ैया समेत तीस गांवों में बाढ़ का पानी भरा है। यह पानी गांव की गलियों और घरों में भरा हुआ है। पानी भरे होने से कई ग्रामीणों के घरों में भोजन पकाने तक की जगह नहीं है। इससे ग्रामीणों ने घर छोड़कर गृहस्थी लेकर
सड़क किनारे पॉलिथीन तान कर आशियाना बना लिया है। वहीं इधर-उधर से ईंधन व राशन की व्यवस्था कर भोजन पकाते और पेट भरते हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री वितरण नहीं कराई। स्वास्थ्य टीम भी गांवों में नहीं जा रही है। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों मे खांसी, बुखार, खुजली व अन्य बीमारियों से ग्रसित ग्रामीण दवा के अभाव में परेशान हैं। हरसिंहपुर कायस्थ की श्रीदेवी की शनिवार को तबीयत ज्यादा खराब हो गई। उनको परिवार के लोग नाव पर लिटा कर पड़ोस के गांव शिकारपुर लेकर गए। रास्तों में पानी भरा होने से गांव के लोग नाव, ट्रैक्टर ट्राली से भरे पानी को पार कर खरीदारी करने बाजार पहुंच रहे हैं।
शमसाबाद। गंगा में आई बाढ़ से तटवर्ती गांवों में पानी भरने से ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित है। शमसाबाद के गांव कटरी तौफीक में बाढ़ का पानी घरों में भरा है। गंगा का जलस्तर कम न होने से गांव के लोगों की परेशानियां जस की तस है। खेतों से चारा भी नाव से लेकर आना पड़ रहा है। ग्रामीण राकेश कुमार ने ट्रैक्टर ट्राली पर आशियाना बना लिया है। शोभित कुमार ने बताया कि घर में पानी भरा है। दिन और रात चारपाई पर रहना पड़ता है। ग्रामीण अमर सिंह ने बताया कि हर साल बाढ़ आती है और घरों में पानी भर जाता है।