फर्रुखाबाद। झोलाछापों के सहारे चल रहे निजी अस्पताल के संचालकों को अब नवीनीकरण के लिए डॉक्टर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इससे आवेदन की तिथि निकलने के बाद भी निजी अस्पताल किराए पर डॉक्टर की डिग्री लेने के लिए जोड़तोड़ में जुटे हैं। वहीं, आईएमए ने डॉक्टरों वाले निजी अस्पतालों के नवीनीकरण के लिए सूची सौंप दी है।
जनपद में 178 निजी अस्पताल संचालित हैं। इसके सापेक्ष आईएमए की सूची में एमबीबीएस 106 डॉक्टर ही सदस्य हैं। इनमें भी कई डॉक्टर सरकारी सेवा दे रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो सरकारी पगार लेकर अपना अस्पताल भी चला रहे हैं।अभी तक प्रति वर्ष अस्पताल के लाइसेंस का नवीनीकरण होता रहा। अब शासन के नए नियम के तहत पांच वर्ष का नवीनीकरण किया जाना है। जिले में अस्पताल संचालक गैर जनपदों में रहने वाले या पढ़ने वाले डॉक्टरों की डिग्री किराए पर लेकर पंजीकरण कराने के बाद मरीजों का झोलाछापों से इलाज करा रहे हैं। ऑनकाल सुविधा के नाम पर बोर्ड में कई डॉक्टरों के नाम लिख रखे हैं। आईएमए की ओर से अब तक 53 निजी अस्पतालों के नवीनीकरण के लिए सूची सौंपी गई है।
इससे साफ है कि इन्हीं अस्पतालों में स्थायी डॉक्टर भी मौजूद होंगे। शेष 123 निजी अस्पतालों में कुछ को छोड़ दें, फिर भी 100 से अधिक अस्पताल बिना स्थायी डॉक्टर के मरीजों को धोखा दे रहे हैं। अब सभी अस्पतालों को अपने पंजीकरण का नवीनीकरण कराना है। इससे किराए की डिग्री के भरोसे अस्पताल चलाने वाले संचालकों को अब डॉक्टर ढूंढे नहीं मिल रहे। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग में सक्रिय बिचौलिये झोलाछापों के अस्पताल का नवीनीकरण कराने की जिम्मेदारी लेकर रुपये ऐंठने में जुटे हैं। खास बात तो यह है कि यह बिचौलिये प्रति वर्ष नवीनीकरण कराने में सफल भी हो जाते हैं।
बिना डॉक्टर नहीं होगा नवीनीकरण
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि अब तक 130 अस्पतालों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। पत्रावलियों का गहनता से परीक्षण कराया जा रहा है। स्थायी डॉक्टर व हस्ताक्षर सत्यापन के बाद भी नवीनीकरण पर विचार होगा। शासनादेश के अनुसार सभी औपचारिकता पूरी न होने तक नवीनीकरण नहीं होगा।