फर्रुखाबाद। जिले भर के सरकारी अस्पतालों में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे थे, मगर इस वक्त सभी ओपीडी बंद होने से गांवों में स्थिति नाजुक है। ऐसे वक्त में गांव-गली में बैठे डॉक्टर ही उपचार कर उनकी जान बचा रहे हैं। स्वास्थ्य महकमे को गांव की जनता की कतई चिंता नहीं है।
इस वक्त गांवों में खांसी, जुकान, बुखार से स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। अधिकांश घरों में दो-चार सदस्य बीमारियों से ग्रस्त हैं। कोरोना संक्रमण से पहले डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में औसतन 800 मरीज तक प्रतिदिन दवा लेने पहुंच रहे थे। सीएचसी व पीएचसी पर भी 100 मरीजों से अधिक की भीड़ लगती थी। मगर कोरोना काल में ओपीडी बंद हो गई, जबकि संक्रामक रोग तेजी से बढ़े हैं।
यही नहीं बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों ने भी मरीजों को देखना न के समान कर दिया हैै। कोरोना संक्रमण के दौर में परेशान लोग गांव व शहर में छोटे-छोटे क्लीनिक चलाने वालों के यहां गांव व शहर के लोग इलाज कराने को मजबूर हैं।
स्थिति यह है कि शहर से सटे गांवों, मोहल्लों में छोटे-छोटे क्लीनिक चला रहे डॉक्टरों के यहां मरीजों की भीड़ लग रही है। छोटी दुकानों में ही बोतलें भी चढ़ाई जा रही हैं। बड़े अस्पताल भले ही कोरोना का भय दिखाकर मरीजों को न देख रहे हों, मगर गांव व मोहल्लों में क्लीनिग खोले बैठे डॉक्टर गरीब ग्रामीण जनता के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। गांव में खांसी, जुकाम, बुखार के बढ़ रहे रोगियों के इलाज के लिए जिला स्वास्थ्य महकमा के पास कोई ठोस रणनीति नहीं है। इससे जनता असहाय सी हो गई है।