फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पालिका के आश्रय स्थल में एक गोवंश की मौत, चार बीमार

विज्ञापन
ट्रांजिट हास्टल स्थित गोशाला में खुले में लेटा गोवंश। - फोटो : FARRUKHABAD
विज्ञापन
फतेहगढ़ स्थित नगरपालिका के ट्रांजिट हास्टल में बनी अस्थायी गोशाला में मंगलवार को एक गोवंश की फिर मौत हो गई जबकि बच्चा देने वाली गाय मरणासन्न है। इसके अलावा तीन गोवंश सांड़ के हमले से घायल हैं। आश्रय स्थल में गोवंश की संख्या के सापेक्ष न तो टिन शेड है और न चरनी। इससे कमजोर गोवंश को चारा मिलना भी मुश्किल है।
विज्ञापन

शहर में नगरपालिका की तीन अस्थायी गोशालाएं हैं। फतेहगढ़ स्थित ट्रांजिट हास्टल गोशाला में मंगलवार को बोर्ड पर 174 गोवंश अंकित थे। जैसे ही गेट खुला तो नगरपालिका का लोडर मृत गोवंश को लादकर ले जाते दिखा। अंदर का नजारा यह था कि एक कमजोर गाय बच्चा पैदा होने के बाद किनारे मरणासन्न पड़ी थी। बच्चा धूप में पड़ा था।
वह भी दूध न मिल पाने से अचेत सा दिखा। करीब आठ माह से चल रही गोशाला में अब तक न तो पर्याप्त टिन शेड की व्यवस्था हो सकी और न ही चरनी की। गोशाला के बोर्ड पर अंकित 82 सांड़, 42 गाय व 50 बच्चे के सापेक्ष 60-70 गोवंश की क्षमता वाला एक टिनशेड, जबकि मैदान में 15 चरनी रखी थीं।
विज्ञापन

उनमें पड़ा भूसा सांड़ खाने में जुटे थे, जबकि गाय व बच्चे उनका मुंह ताक रहे थे। चरनी कम होने से उन्हें सूखा भूसा खाने को भी मौके का इंतजार करना पड़ता है।
एक गोवंश की मौत व एक गाय मरणासन्न होने के बावजूद डाक्टर को जानकारी तक नहीं दी गई। नगरपालिका के लिपिक विजय शुक्ला ने बताया कि एक सांड़ की मौत हुुई है।
बच्चा देने वाली गाय को इलाज की जरूरत है। डाक्टर अभी पहुंचे नहीं। चरनी व टिनशेड की कमी की जानकारी अधिशासी अधिकारी को भी है। इसकी शीघ्र व्यवस्था किए जाने का आश्वासन दिया गया है। वहीं पशु चिकित्सक डा.देवेंद्र सिंह ने बताया कि गोशाला में न तो कोई गोवंश मरने और न ही गाय के बच्चा देने की उन्हें सूचना दी गई।
सोमवार को वह गोशाला में सांड़ के हमले से घायल तीन गायों व दो बीमार गायों का उपचार कर आए थे। गोशाला में सांड़, गाय व बच्चे एक साथ बंद होने से दिक्कत आ रही है।
मृत गोवंश का नहीं रखा जाता रिकार्ड
आश्रय स्थलों में विभिन्न कारणों से मरने वाले गोवंश का कोई रिकार्ड नहीं रखा जा रहा है। उन्हें मरने के बाद सीधे लोडर से ठिकाने पर पहुंचाकर दफना दिया जाता है।
इस संबंध में पशु चिकित्सक देवेंद्र सिंह ने बताया कि विवादित मामला होने पर मृत गोवंश का पोस्टमार्टम कराया जाता है। इसका उनके पास रिकार्ड रहता है। कोई एफआईआर या विवाद न होने से मृत गोवंश के पोस्टमार्टम नहीं कराए जा रहे हैं। पंचनामा भरकर शव दफनाने के आदेश हैं।
दूसरी ओर नगरपालिका के लिपिक गोशाला प्रभारी विजय शुक्ला ने बताया कि पंचनामा भरने के लिए नगरपालिका में कोई कमेटी भी नहीं बनी। इससे बिना पंचनामा के मृत गोवंश दफनाए जा रहे रहे हैं। इसका रिकार्ड रखना पशु चिकित्सा विभाग की जिम्मेदारी है। नगरपालिका के पास मृत गोवंश का कोई रिकार्ड नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें