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अधिकारियों टीम को चलता मिला छपाई कारखाना

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फर्रुखाबाद। शहर में अवैध रूप से चल रहे छपाई कारखानों का सच जानने आई थर्ड पार्टी अधिकारियों की टीम को कारखाना चलता मिला। अधिकारियों को देखकर कर्मचारी भाग गए। कारखाने में हड़कंप मच गया। टीम को 26 कारखाने आवंटित किए गए थे, मगर 15 की जांच कर औपचारिकता पूरी कर ली गई।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने छपाई कारखानों का सच जानने के लिए थर्ड पार्टी टीम बनाकर जिले के 26 कारखानों की जांच के निर्देश दिए थे। इसके लिए मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी प्रयागराज के असिस्टेंट प्रोेफेसर प्रमोद सोनी, असिस्टेंट प्रोफेसर आरती वैश्य के साथ चार सदस्यों को भेजा। टीम ने खानपुर, इंडस्ट्रियल एरिया, आंबेडकर नगर नरकसा के चार-चार, खटकपुरा और अंगूरीबाग के कारखानों की जांच की। टीम के अधिकारियों ने कारखानों में जाकर वीडियोग्राफी की।
शुक्रवार की दोपहर टीम के अधिकारी अंगूरीबाग, गंगा दरवाजा के पास सुमित प्रिंट नाम के कारखाने में पहुंचे। कारखाने में उस वक्त छपाई, धुलाई, रंगाई और पैकिंग का काम चल रहा था। टीम को अचानक देख कारखाने में हड़कंप मच गया। काफी देर बाद गेट खोला गया।
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टीम के अधिकारी अंदर पहुंचे तो महिला, पुरुष और काम कर रहे बच्चे भाग गए। कारखाने में शोर शुरू हो गया। कुछ लोगों ने टीम का अंदर घुसने का विरोध भी किया। हालांकि फिर मामला शांत हो गया। टीम ने कारखाने की वीडियोग्राफी कर फोटो भी खींचे। टीम अपनी रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपेगी। बताया जाता है कि टीम ने 15 कारखानों की ही जांच की। शाम को टीम रवाना हो गई।
कारखानों में ताला डालकर बाहर जाने का बहाना
शहर के मोहल्ला अंगूरीबाग में कई कारखानों में ताले पड़े मिले। स्थानीय अधिकारियों ने टीम से कह दिया कि ये लोग बाहर चले गए हैं, जबकि सच यह है कि ये कारखाने धड़ल्ले से चल रहे हैं। अपनों को बचाने के लिए यह खेल किया जा रहा है।
अधिकारियों ने पहले ही दे दी थी सूचना
उत्तर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर के अधिकारियों के संरक्षण में छपाई कारखाने चलाए जा रहे हैं। थर्ड पार्टी टीम की जांच होने की जानकारी इन अधिकारियों को पहले से ही थी। लिहाजा उन्होंने अपने चहेतों को पहले ही सूचना दे दी थी।
वर्जन...
थर्ड पार्टी टीम को किन कारखानों की जांच करनी है, उन्हें उच्चाधिकारियों से ही सूची मिली थी। कारखानों तक पहुंचाने में सहयोग करने के लिए कहा गया था। टीम ने क्या किया, जानकारी नहीं है। टीम सीधे केंद्रीय कार्यालय को रिपोर्ट सौंपेगी। -फरेश कुमार, सहायक पर्यावरण अभियंता, कानपुर।
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