फर्रुखाबाद। 75 बेड की फतेहगढ़ सीएचसी में सात माह से एक भी प्रसव नहीं कराया गया। यहां भरपूर संसाधन होने के साथ महिला डॉक्टर व स्टाफ की भी तैनाती है। सीएमओ कार्यालय के पास चल ही सीएचसी की स्वास्थ्य सेवाएं ओपीडी तक ही सीमित हैं।
सीएमओ कार्यालय से जुड़े परिसर में 75 बेड की सीएचसी है। कोराना महामारी के दौरान यहां 100 बेड का एल-2 अस्पताल बनाया गया था। उस दौरान सभी बेड मरीजों से भरे थे। महामारी के बाद इस अस्पताल में संसाधन बढ़ाए गए। जांच के लिए आधुनिक मशीनें लगी हैं। ढाई वर्ष पूर्व अस्पताल में प्रसव सुविधा चालू करने के लिए संसाधन भी जुटाए गए। पहला प्रसव होने पर प्रसूता को तत्कालीन जिलाधिकारी ने सम्मानित भी किया। इसके बाद करीब एक वर्ष से अधिक तक एक भी प्रसव नहीं कराया गया।
गत वर्ष अधिकारियों की नींद टूटी और फिर प्रसव कराया गया। इसके बाद एक-दो माह में प्रसव होते रहे। 6 जनवरी को गांव हाजीगंज याकूतगंज निवासी शमशाद की पत्नी साहीन का प्रसव कराया गया। इसके बाद से यहां प्रसव सुविधा पूरी तरह बंद चल रही है। सात माह में एक भी प्रसव नहीं कराया गया।
अस्पताल में ये हैं सुविधाएं
सीएचसी फतेहगढ़ में पांच वेंटिलेटर हैं। ऑक्सीजन प्लांट लगा है। लेबर रूम में सुविधाओं से लैस पांच बेड पड़े हैं। अस्पताल में सीबीसी, लिवर, किडनी सहित खून की सभी जांचों की सुविधा है। महिला डॉक्टर व स्टाफ नर्सों की तैनाती भी है। प्रसव के लिए सभी आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं। इसके बावजूद अधिकारियों की अनदेखी से यहां प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं। लेबर रूम में ताला पड़ा रहता है। महिला वार्ड में बेड खाली पड़े हैं।
गर्भवती महिलाओं की होती है जांच
फतेहगढ़ सीएचसी में तैनात डॉ. संध्या वर्मा अपने कक्ष में मरीज देख रही थीं। पूछने पर उन्होंने बताया कि अस्पताल में ओपीडी के दौरान गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। खून की कमी होने पर आयरन सुक्रोज दिया जाता है। इंजेक्शन भी लगाए जाते हैं। अस्पताल में कुल 35 लोगों का स्टाफ है। उनके अलावा डॉ. चंद्र विक्रम सिंह व अधीक्षक डॉ. दीपक कटारिया की तैनाती है। रात में कोई कर्मचारी न रुकने से प्रसव नहीं कराए जा रहे।
अस्पताल का सीएचसी में नहीं है पंजीकरण
डॉ. संध्या वर्मा ने बताया कि अस्पताल का अभी तक सीएचसी में पंजीकरण ही नहीं है। इससे प्रसव होने पर प्रसूता को जननी सुरक्षा योजना, आयुष्मान योजना, जन्म प्रमाणपत्र, भोजन व नाश्ता की भी कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में संसाधन भले ही भरपूर हैं लेकिन पंजीकरण न होने से प्रसूता को योजनाओं का लाभ दे पाना संभव नहीं हो पाता।