मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सपाइयों को सख्त हिदायत दी। एक-दूसरे की शिकायत
सुनने से झल्लाए मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि नेताजी कुश्ती और मैं फुटबाल
का खिलाड़ी हूं। सीएम की इशारा समझते ही सपाई शांत हो गए। उन्होंने साफ
शब्दों में कहा कि कोई भी विधायक दूसरे की विधानसभा क्षेत्र में हस्तक्षेप
किया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस लाइन सभागार में
विधायक और संगठन के जुड़े लोगों की बैठक के दौरान अमृतपुर विधायक नरेंद्र
सिंह यादव और अलीगंज विधायक रामेश्वर यादव का खेमा बांह बटोरे नजर आया।
मुख्यमंत्री के सामने ही सभागार में आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए। पूर्व
मंत्री व विधायक नरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि कुछ लोग दूसरों की विधानसभा
में आकर हस्तक्षेप कर रहे हैं।
ये अच्छी बात नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री
से कहा कि पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे
लिखवाना बंद किए जाएं। अलीगंज विधायक रामेश्वर सिंह यादव ने कहा कि लोकसभा
चुनाव में विधायक पुत्र की टिकट कटने के बाद उन्हें टिकट मिली तो उनके
खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया। पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह राठौर ने कहा
कि उनके खिलाफ
अलीगंज में फर्जी बलात्कार का मुकदमा दर्ज करवा दिया गया। इस
पर मुख्यमंत्री ने डीआईजी नीलाब्जो चौधरी को बुलवाकर कहा कि वह इस मामले
को दिखवाएं। डीआईजी ने कहा कि मामला अलीगंज क्षेत्र का है। सीएम ने पूर्व
जिलाध्यक्ष को आश्वासन दिया कि वह आगरा रेंज के डीआईजी से कहकर मामले को
निपटवाएंगे। मुख्यमंत्री ने कड़ी हिदायत देते हुए
कहा कि आपस में तालमेल
बनाकर रखें। कोई किसी की विधानसभा क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
दोबारा अगर ऐसी शिकायत मिलती है तो कड़ा निर्णय लेने को मजबूर होंगे।
विधानसभा 2017 का चुनाव नजदीक आ रहा है। ऐसे में आपसी
कलह से पार्टी को
नुकसान होगा। बैठक में जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह यादव, विधायक अजीत कठेरिया,
पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रपाल यादव, रामसेवक यादव, नदीम अहमद फारुकी, सुरेश
कुमार, रामप्रकाश यादव और दलगंजन सिंह, राजेश यादव आदि मौजूद रहे।
पार्टी से निकालो या पंचायत करवा दो
अमृतपुर विधायक और अलीगंज विधायक के बीच चल रही तनातनी अब संगठन के लोगों
को भी नागवार गुजरने लगी है। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान एक वरिष्ठ
नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से यहां तक कह डाला किया तो
पार्टी से इन दोनों विधायकों को बाहर करें या फिर दोनों में पंचायत करवा
दें। आपसी खींचतान से पार्टी का नुकसान हो रहा है।
दोनों विधायकों की आपसी
रार का असर संगठन के लोगों पर पड़ रहा है। इसका नतीजा रहा कि लोकसभा चुनाव
में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। अगर यही चलता रहा तो विधानसभा चुनाव
में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से
लेते हुए कार्रवाई की चेतावनी दे डाली है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व सांसद को बंधाया ढाढ़स
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव के घर
पहुंचकर उनके पुत्र के निधन पर शोक जताया। मुख्यमंत्री के साथ अलीगंज
विधायक रामेश्वर यादव और जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह यादव मौजूद रहे। लघु
सिंचाई विभाग के सलाहकार सतीश दीक्षित को पुलिस ने रोक दिया। करीब आधे घंटे
बाद अलीगंज विधायक के कहने पर दीक्षित को अंदर
जाने की अनुमति मिली।
मुख्यमंत्री के आने से पहले ही उनके दो कमांडो पूर्व सांसद के आवास पर
पहुंच गए। करीब 11.20 बजे मुख्यमंत्री पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव के आवास
पर पहुंचे और 12.05 बजे आवास से बाहर निकले और हाथ हिलाते हुए कार से
पुलिस लाइन रवाना हो गए।
खटिक समाज के लोगों ने सीएम की गाड़ी रोकने का किया प्रयास
जाति प्रमाण पत्र न बनने से गुस्साए खटिक समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट के
सामने मुख्यमंत्री की गाड़ी को रोकने का प्रयास किया। यह देख पुलिस प्रशासन
के हाथपांव फूल गए। जैसे-तैसे पुलिस ने घेराबंदी कर खटिक समाज के लोगों को
रोका। सीएम का काफिला गुजरने के बाद खटिक समाज के लोग दोबारा पुलिस लाइन
गेट पर पहुंचे और नारेबाजी करने लगे। इस
दौरान मुख्यमंत्री पत्रकारों के
साथ वार्ता कर रहे थे। नारेबाजी देख सीओ योगेश कुमार ने खटिक समाज के लोगों
को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह लोग नहीं माने। पुलिस ने मुकदमा दर्ज
करने की धमकी भी दी। इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनकी मांगों का ज्ञापन
डीएम ने मुख्यमंत्री को सौंप दिया है। इसके बाद खटिक समाज के लोग वापस
लौटे।
नहीं मिल सकीं आरोपियों के घर की महिलाएं
नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव गढिय़ा बबना में बीते दिन हुए दोहरे
हत्याकांड में नामजद किए गए लोगों की घरों की महिलाएं मुख्यमंत्री से मिलने
पूर्व सांसद के आवास पर आई। महिलाओं को देख पुलिस कर्मियों ने रास्ते में
रोक लिया। इनको मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया।
मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव जिस समय पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव के आवास पर थे। उसी दौरान करीब
11.40 बजे पिछले दिनों गढ़िया बबना में हुए दोहरे हत्याकांड में नामजद किए
गए आरोपियों के घरों की महिलाएं मुख्यमंत्री से मिलने पहुंच गईं। मऊदरवाजा
थानाध्यक्ष सुनील यादव ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने महिलाओं को गली के
अंदर करते हुए कहा कि
मुख्यमंत्री शोक संवेदना व्यक्त करने आए हैं। इसलिए
यहां पर समस्याएं नहीं सुनेंगे। पुलिस लाइन जाकर वह लोग समस्या बता सकती
हैं। इस पर महिलाएं निराश होकर बैरंग लौट गईं। महिलाओं का कहना था कि
गढिय़ा बबना हत्याकांड में उनके परिवार के लोगों को फर्जी तरीके से फंसाया
गया है।
मंदिर बंद करने पर भक्तों ने जताया रोष
मुख्यमंत्री के आने को लेकर जिला प्रशासन काफी सख्ती बरती। पुलिस ने
पुजारी से पांडेश्वरनाथ मंदिर बंद करने को कहा। इससे भक्तों में रोष फैल
गया। मामला बढ़ता देख पुलिस ने कहा कि मंदिर खुला रहे लेकिन मंदिर के बाहर
भक्त वाहन न
खड़ा करें और न ही भीड़ लगाएं। पुलिस ने बाहर बैठे भिखारियों
को भगा दिया। दर्शन करने आए चंदन कुशवाह, सुनील चौबे, मुन्नी देवी,
रामसिंह, राहुल कुमार, अमित दीक्षित और रामकुमार का कहना था कि मुख्यमंत्री
के लिए मंदिर बंद करवाना ठीक नहीं है।
खुले पड़े मैनहोल को नहीं कराया बंद
पूर्व
सांसद के घर के पास स्थित पुलिया के एक किनारे मैनहोल खुला था। जिला
प्रशासन ने इसे बंद कराने की जहमत नहीं उठाई। मुख्यमंत्री के काफिले के
गुजरने से पहले आए सिटी मजिस्ट्रेट की नजर इस पर पड़ी लेकिन उन्होंने भी
ध्यान नहीं दिया। मुख्यमंत्री का काफिला इसी पुलिया से जब गुजरा तो गनीमत
रही कि उनकी कार का पहिया इस मेनहोल में नहीं गया।
सीएम को धचके से बचाने को तुड़वाए ब्रेकर
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कार में झटका न लगे। इसको लेकर जिला प्रशासन
ने उनके रूटों पर पड़ने वाले ब्रेकरों को तुड़वा डाला। मुख्यमंत्री के
काफिले को पुलिस लाइन से ठंडी सड़क, रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद व रेलवे रोड
से होते हुए पलरिया स्थित पूर्व सांसद के आवास पर जाना था। मुख्यमंत्री को
कार में झटका न लगे इसको लेकर जिला प्रशासन ने पांडेश्वरनाथ
मंदिर से लेकर
सूर्या होटल तक पड़ने वाले ब्रेकरों को तुड़वा दिय। इसके साथ ही भोलेपुर
हनुमान मंदिर के पास से तिवारी नर्सिंग होम तक लगे प्लास्टिक के ब्रेकरों
को भी हटवा दिया गया।
हंगामे को लेकर पुलिस अलर्ट, लिस्ट में नाम वाले ही गए अंदर
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव समेत कई वरिष्ठ नेता जब भी फर्रुखाबाद आए तो
सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस लाइन गेट पर हंगामा किया। दरोगा के साथ मारपीट
भी कर चुके है। इस कारण इस बार प्रशासन ने काफी सख्ती रखी। पुलिस ने उन
लोगों को गेट से प्रवेश दिया, जिनका सूची में नाम था। मुख्यमंत्री का
कार्यक्रम सकुशल निपटने पर जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली।
कुछ समय
पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव वरिष्ठ नेता सतीश दीक्षित के यहां पर हुए
कार्यक्रम में आए थे। पुलिस ने सपा नेताओं की गाड़ियों को गेट पर रोक
दिया। इस पर सपा नेताओं ने दरोगा के साथ मारपीट कर दी थी। इसी तरह केबिनेट
मंत्री शिवपाल बीते दिनों जिले में हुए सहकारिता कार्यक्रम आए थे। उनके
कार्यक्रम में भी सपा नेताओं ने हंगामा किया। बीते कार्यक्रमों में हुए
हंगामों को लेकर जिला प्रशासन ने सतर्कता बरती। सपा जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह
यादव, सतीश
दीक्षित, विधायक नरेंद्र सिंह यादव, विधायक अजीत कठेरिया,
विधायक विजय सिंह , विधायक रामेश्वर यादव, पूर्व विधायक अरविंद प्रताप
सिंह, पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत, पूर्व विधायक सुरेश यादव, पूर्व विधायक
इजहार आलम खां, पूर्व जिलाध्यक्ष रामसेवक यादव, दलगंज सिंह यादव, चंद्रपाल
सिंह यादव, डा. जितेंद्र यादव, सुबोध यादव, मंदीप यादव, अनिल मिश्रा,
प्रदीप यादव, पीयूष यादव, राधेश्याम, अजय कश्यप, उदयपाल यादव की लिस्ट जारी
कर दी। पुलिस लाइन गेट पर मौजूद अनूप तिवारी ने इनको ही अंदर भेजा।
डीएम से सड़कों का स्टीमेट बनाने को कहा
पुलिस लाइन सभागार में सदर विधायक विजय सिंह ने शहर के मुख्यमार्गों की
दुर्दशा से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को तीन
दिन में स्टीमेट बनवाने को कहा। सदर विधायक ने बताया कि उन्होंने पीडब्लूडी
एक्सईएन को रेलवे क्रासिंग फर्रुखाबाद से वाया ठंडी सड़क, फतेहगढ़ चौराहा
तक, लालदरवाजा से पांचाल घाट तक,
साहबगंज चौराहा से माधौपुर तक, कादरी गेट
से लकूला मसेनी, लोको तक, लकूला से आवास-विकास और जसमई तिराहा से मुरहास
कन्हैया तक, जसमई दरवाजा से पुठरी मंदिर तक, बीबीगंज से हथियापुर तक,
भोलेपुर क्रासिंग से कौशलेंद्र यादव
के पेट्रोल पंप तक की सड़कों का ब्यौरा
सौंप दिया है। उन्होंने बताया कि सीएम ने दो घंटे बिजली आपूर्ति बढ़ाने के
निर्देश भी दे दिए हैं। इसी क्रम में पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव के आवास
पर डीआईओएस और बीएसए ने जिलाधिकारी को फाइलें दीं। डीएम ने इन फाइलों को
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दिया।
भोजपुर विधायक नहीं पहुंचे
मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से जारी की गई
लिस्ट में भोजपुर विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी का नाम था लेकिन वेनहीं
पहुंचे। हालांकि उनके बेटे अरशद जमाल मिलने पहुंचे।
दोपहर 12.30 बजे तक बाजार रहा बंद
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आगमन को लेकर दोपहर 12.30 बजे तक बाजार बंद
रहा। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुबह से ही पुलिस शहर में चप्पे-चप्पे पर
तैनात थी। इस दौरान रेलवे रोड, नेहरू रोड, त्रिपोलिया चौक और घुमना बाजार
बंद रहे। दोपहर 12.05 बजे मुख्यमंत्री पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव के आवास
से बाहर आए और गाड़ी में बैठकर पुलिस लाइन रवाना हुए। दोपहर 12.30 बजे तक
बाजार बंद रहा।