फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल के वार्डों में लगे पंखे या तो बंद हैं या बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। इससे मरीज गर्मी से परेशान हैं। वहीं, मरीजों को तीन-तीन दिन से चादर तक नहीं दी गई।
रविवार को बर्न यूनिट के वार्ड में भर्ती मरीज नवाबगंज के गांव बघौना निवासी राजकुमार (70) को पंखा न चलने तथा इलाज में लापरवाही करने का आरोप लगाकर परिजन ने मुख्य मार्ग पर लिटा दिया था। इसके बाद सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने शीघ्र व्यवस्था दुरुस्त कराने की बात कही थी। मगर सोमवार दोपहर ढाई बजे तक बर्न यूनिट के वार्ड में लगे दो पंखों में एक खराब पड़ा था। उस समय एक मरीज भर्ती था।
सर्जिकल वार्ड एफ-4 में चार बेड पर मरीज भर्ती थे, इनमें से दो छुट्टी होने से घर जाने की तैयारी में थे। एक मरीज को छोड़ तीन मरीजों को चादर तक मुहैया नहीं कराई गई। लिहाजा वह फोम के गद्दों पर ही लेटे थे। आर्थो के एक वार्ड में चार में से दो पंखे काफी धीमी गति से चल रहे थे। मरीजों को हवा तक नहीं लगती।
डॉक्टर न होने की बात कहकर कर दी छुट्टी
जहानगंज के झसी निवासी राकेश कुमारी ने बताया कि पैर में दर्द की वजह से शनिवार को भर्ती हुई थीं। एक्सरे कराने की बात कही, तो नहीं कराया। एक कर्मचारी ने एक कागज पर दस्तखत करवाकर कह दिया कि छुट्टी हो गई। अब मजबूरी में घर जा रही हैं।
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तीन दिन से नहीं मिली चादर, लेटना मुश्किल
कादरीगेट निवासी ऊषा ने बताया कि उनकी बहू रश्मि तीन दिन से भर्ती है। जब से भर्ती हुई, तब से चादर नहीं मिली। कई बार कहने पर भी नहीं दी गई। बिजली चली जाने और दिन में गद्दे पर लेटना मुश्किल होता है।
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तीसरे दिन लिया नमूना, बिना चादर के हो रही दिक्कत
अंडियाना में ननिहाल में रह रही हेमा ने बताया कि शनिवार को बुखार आने पर भर्ती हुई थी। सोमवार को जांच के लिए नमूना लिया गया। अभी सिर का दर्द बंद नहीं हो रहा है। कई बार कहने पर भी चादर नहीं दी गई।
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सुबह लिए नमूने दोपहर में पहुंचे लैब
मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों के सुबह कर्मियों ने रक्त के नमूने लिए थे। मगर उन्हें लैब तक पहुंचाने की जरूरत नहीं समझी। दोपहर दो बजे जब दूसरे कर्मचारी आए, तब पता चला कि नमूने रखे हैं। इसके बाद ही उन्हें लैब में भेजा गया।
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-चादरों की कोई कमी नहीं है। फिर भी यदि नहीं दी गई, तो वह इसे दिखवाएंगे। बर्न यूनिट का पंखा शाम को सही करवा दिया है। उसमें रोशनी की व्यवस्था के लिए इन्वर्टर की बैटरी बदलवा दी है। जेनरेटर ओवरलोड होने की वजह से प्रथम तल पर कनेक्शन नहीं है।
-डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।