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Farrukhabad News: लापरवाही पुलिस की, भुगत रहा घायल मुनीम

Mon, 02 Jun 2025 03:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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 सीएचसी राजेपुर में तीन दिन बाद होता मेडिकोलीगल। - फोटो : सीएचसी राजेपुर में तीन दिन बाद होता मेडिकोलीगल।
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फर्रुखाबाद। रामऔतार ने बताया कि लोहिया अस्पताल में उसे बाहर एक्सरे कराने के लिए कहा गया, जिसमें उसके 8500 रुपये खर्च हो गए। लोहिया में सी-आर्म मशीन न होने से चार फरवरी को हायर सेंटर कानपुर के लिए रेफर कर दिया गया। यहां चिकित्सक ने जांघ की नस में गोली फंसे होने की बात कहकर आठ दिन की दवा देकर घर भेज दिया।
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पीड़ित ने बताया कि बिना मजरूबी चिट्ठी के वह तीन दिन तक सैफई व फर्रुखाबाद चक्कर लगाता रहा। सैफई में डॉक्टर पुलिस पर गुस्सा कर रहे थे। साथ में जो सिपाही गया था। उसने डॉक्टरों को बताया कि थाने से चिट्ठी नहीं दी गई है। जिसके बाद डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया। काफी मिन्नतें करने बाद वहां भर्ती हुआ लेकिन, जब दूसरे दिन भी पुलिस के कागज नही आए तो वहां से फिर वापस सीएचसी राजेपुर आना पड़ा।


अब तक क्या हुआ
- एक तारीख को राजेपुर थाना क्षेत्र में दुकान बंद कर वापस लौट रहे सराफा कारोबारी संग लूट हुई। बदमाशों ने मुनीम को गोली मार दी और नगदी जेवरात लूट ले गए।
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- पुलिस घायल मुनीम रामऔतार को सीएचसी राजेपुर लेकर गई। डॉक्टर ने मजरुबी चिट्ठी मांग तो थानाध्यक्ष ने धमकी देते हुए घायल को जिला अस्पताल रेफर करने का दबाव बनाया।
- पुलिस ने अपने क्षेत्राधिकारी के साथ जिला अस्पताल शाम को 8:30 मिनट पर पहुंची। मजरुबी चिट्ठी जिला अस्पताल में भी नहीं दी गई।
- पुलिस ने जिला अस्पताल में दबाव बनाकर बगैर मजरुबी चिट्ठी के घायल रामऔतार को सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
- सैफई मेडिकल कॉलेज में भी घायल से मजरुबी चिट्ठी मांगी गई। पुलिस की लापरवाही के चलते पीड़ित को सैफई से तीन तारीख को राजेपुर थाने भेजा गया। जहां तीन फरवरी को यानि घटना के तीन दिन बाद मजरुबी चिट्ठी बनाई गई। जिसके बाद सीएचसी राजेपुर में आवश्यक प्रपत्र बनाए गए और जिला अस्पताल दोबारा रेफर किया गया।
- चार फरवरी को घायल रामऔतार को कानपुर हैलट अस्पताल रेफर किया गया।
- कानपुर हैलट में घायल रामऔतार का परीक्षण किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि गोली नस में फंसी है। एक हफ्ते बाद ऑपरेशन करके निकाली जाएगी।
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पांच दिन से जांघ में फंसी गोली, कहीं जान पर न बन आए

फर्रुखाबाद। पुलिस के कागजी खेल में उलझने की वजह से घायल मुनीम रामऔतार की जांघ में बीते पांच दिन से गोली फंसी हुई है।डॉक्टर कहते हैं कि गन शॉट के मामलों में ज्यादा दिनों तक शरीर में गोली फंसी रहने से सेप्टीसीमिया का खतरा बन जाता है।घायल रामऔतार बताते हैं कि कानपुर में डॉक्टरों ने एक्सरे देखा तो आठ दिन की दवा लिखी है।




सेप्टिक होने, हड़्डी गलने और नस फटने का खतरा

लोहिया अस्पताल के जनरल सर्जन डॉ. अमरनाथ ने बताया कि गोली शरीर के किस हिस्से में लगी है उसके अनुसार नुकसान होता है। हालांकि यदि नाजुक जगह है तो सेप्टिक हो सकती है। हड्डी को नुकसान पहुंचा है, तो गला लग सकता है। मांसपेशी में नस को भी फाड़ सकती है। कई बार गोली लंबे समय तक शरीर में बिना नुकसान के पड़ी भी रहती है।गनशॉट में बारूद की वजह से सेप्टिक का खतरा रहता है।

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मजरुबी चिट्ठी भेजना पुलिस का जरूरी कार्य है। उस वक्त नहीं भेजी गई तो इसे कुछ घंटे बाद में भी हायर सेंटर में भेज दिया जाना चाहिए था। ऐसा लगता है कि थाना स्तर के पुलिसकर्मी घटना की गंभीरता पर पर्दा डालने जैसा कृत्य कर रहे थे। शायद यह अंदेशा होगा कि घाव गन शॉट का है या नहीं स्पष्ट नहीं होने पर घटना की प्रकृति कुछ बदल जाएगी। गंभीर मामला है, अधिकारियों को दोषियों पर कार्रवाई तय करनी चाहिए। - रतन कुमार श्रीवास्तव, पूर्व डीआईजी, उत्तर प्रदेश पुलिस

 सीएचसी राजेपुर में तीन दिन बाद होता मेडिकोलीगल।- फोटो : सीएचसी राजेपुर में तीन दिन बाद होता मेडिकोलीगल।

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