फर्रुखाबाद। मेला रामनगरिया में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के नागा साधुओं ने शोभायात्रा निकालकर करतब दिखाए। वहीं, वैष्णव संप्रदाय के संतों ने शोभायात्रा में तलवार और भालेबाजी का प्रदर्शन किया।
शनिवार को आहवान अखाड़ा बड़ा हनुमान घाट बनारस के नागा साधुओं ने शोभायात्रा निकालकर गंगा में शाही स्नान किया। मेले के अमैयापुर क्षेत्र से सचिव सत्यगिरि के निर्देशन में निकली यात्रा में नागाओं के करतबों को देखने के लिए भारी भीड़ लगी रही। नागा साध्ुाओं की यात्रा में आगे चल रहे नागा भाले और तलवारबाजी का प्रदर्शन कर रहे थे। कुछ नागा साधुओं ने शरीर को मरोड़कर कई तरह के आसन दिखाए।
छठी सीढ़ी से शुरू हुई यात्रा मेला बाजार से होते हुए प्रशासनिक क्षेत्र में पहुंची। यहां साधुओं का माला पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद गंगातट पर पहुंचे नागाओं ने हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ गंगा में डुबकी लगाई। नागाओं के गंगास्नान के बाद पंडा मुकेश ने नागा साधुओं का पूजन अर्चन किया। गंगास्नान के बाद तट पर बालू में साधुओं ने लोट लगाई। शोभायात्रा का समापन अमैयापुर क्षेत्र में हुआ।
यात्रा में अनुमान गिरि, मकरंद गिरि, सरवन गिरि, बालगिरि, शमशान गिरि, डीएम बाबा, कन्हैया गिरि, मंगलगिरि, किशन गिरि, कुबेर गिरि, राजा भारती, भैरव पुरी, प्रेम रतन, महंत काशीपुरी, फक्कड़पुरी, विपिन गिरि आदि मौजूद रहे। वहीं, अखिल भारतीय वैष्णव संत संप्रदाय के संतों ने यात्रा निकाली।
यात्रा पहली सीढ़ी क्षेत्र से होते हुए प्रशासनिक क्षेत्र और गंगातट पर पहुंची। यात्रा में शामिल साधुओं ने तलवारबाजी और लाठी का प्रदर्शन किया। यात्रा का समापन आश्रम पर हुआ। यात्रा में बाबा बालकदास, महंत जगदीश दास, सतीश दास, राघवदास, फूल दास, नरायन दास, मुकेश दास, धर्मदास, दशरथ दास, विष्णुदास, प्रेमदास आदि मौजूद रहे। मेले की पहली सीढ़ी स्थित वटेश्वरधाम से निकली शोभायात्रा में सैकड़ों संतों की भीड़ जुटी। शोभायात्रा की अगुवाई नारायणदास वटेश्वर बाबा ने की। यात्रा में महंत सतीशदास, ज्ञानार्थी, गोपालदास, श्यामकिशोर दास, हरिदास बजरंगदास, श्यामकिशोर दास, सोमवारपुरी और सच्चिदानदं गिरि आदि संत शामिल रहे।
वसंत पंचमी पर धूनी ताप ठाकुरजी को रिझाया
वैष्णव संप्रदाय के संतों ने धूनी तापकर ठाकुर जी को रिझाने का प्रयास किया। बाबा बालक दास ने बताया कि मौसम के अनुसार तपस्या में परिवर्तन करने वाले संतों को त्यागी संत कहते हैं। गर्मी का मौसम वसंत पंचमी के बाद से शुरू होने लगता है। संत धूनी की गर्मी को सहन कर भगवान को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। चाराें ओर कंडों का गोला बनाकर उसमें आग लगाकर धूनी तापी जाती है। धूनी तापने वालों में बंशी वाले, चंडिका दास, मोहन दास, बालक दास, रामप्रकाश दास और रघुवीर दास आदि थे। बाबा बालक दास ने बताया कि त्यागी संत इसी प्रकार से दशहरे तक धूनी तापते रहेंगे।