फर्रुखाबाद। नगर पालिका के रिकॉर्ड शहर में रोज 100 टन कूड़ा निकलने का दावा कर रहे हैं। इस कूड़े को उठाने के लिए वाहनों को कागजों पर दौड़ाया जा रहा है। इसका सच डंपिंग स्थल पर पहुंचने वाले वाहनों को दर्ज करने वाला रजिस्टर बता रहा है।
वाहन पटल और डंपिंग स्थल के रिकॉर्ड देखें तो तेल में बड़ा खेल उजागर होता नजर आ रहा है। कूड़ा डंपिंग स्थल तक पहुंचाने की बजाय शहर के किनारे सड़कों की खाईं भरी जा रही हैं। अभी तक रामलीला गड्ढा में हजारों ट्रॉली कूड़ा डाला जा चुका है।
शहर की सफाई में केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत मोटी रकम खर्च कर रही है। नगर पालिका में वाहन पटल प्रभारी विनय कश्यप 15 ट्रैक्टर-ट्राॅली, हूपर, दो डंपर, दो कॉम्पेक्टर, पांच ट्रैक्टर जेसीबी, एक बड़ी जेसीबी आदि वाहनों को चलाने का दावा करते हैं।
कूड़े के वाहनों पर रोजाना 50 हजार रुपये से अधिक का डीजल डाला जा रहा है। मगर 11 से 17 नवंबर दोपहर दो बजे तक का रिकॉर्ड देखा गया तो 100 ट्रैक्टर-ट्राॅली, 29 डंपर और 13 कूड़ा भरे कॉम्पेक्टर ही डंपिंग स्थल पर पहुंचे।
साफ है कि या तो वाहन चलाने में खेल चल रहा है या फिर बड़ी संख्या में कूड़ां डंपिंग स्थल पर पहुंचाने की बजाय आसपास ही पलटा जा रहा। वाहन चालकों को तेल 12 किमी दूरी के हिसाब से मिलता है। कम दूरी तय करके तेल बचा रहे हैं। रामलीला मैदान के गड्ढे में कूड़ा भरे हजारों वाहन पलटे जा चुके हैं।
चालकों को मरम्मत का नहीं मिलता खर्च
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, हूपर आदि वाहनों पर लगे चालकों को आए दिन होने वाली वाहनों की खराबी की मरम्मत के लिए कोई राशि नहीं मिलती। एक चालक ने बताया कि जो कुछ डीजल बच जाता है, उसी से पंक्चर, बेयरिंग या अन्य छोटी मोटी खराबी को दूर करवा लेते हैं। उन्हें अलग से कुछ नहीं दिया जाता।