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मत्स्य व्यवसाय के लिए हो अलग मंत्रालय : राम नाईक

Fri, 03 Apr 2015 11:44 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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सूबे के राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि मत्स्य व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अलग मंत्रालय जरूरी है। इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी से दो माह पहले वार्ता हुई है। मत्स्य व्यवसाय कृषि के तहत आता है लेकिन इसके लिए कर्ज पर ब्याज ज्यादा है। राज्यपाल शुक्रवार को शहर की आवास विकास कालोनी स्थित मैदान में गुहाराज निषाद राज की जयंती समारोह के
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तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सांसद मुकेश राजपूत की विकास निधि योजना के तहत प्रस्तावित 22 कार्यों का शिलान्यास भी किया।  सुबह  करीब 10.38 बजे राज्यपाल का हेलीकाप्टर क्रिश्चियन इंटर कालेज मैदान पर उतरा। यहां अधिकारियों के  साथ ही सांसद और भाजपा नेताओं ने अगवानी की। यहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राज्यपाल ने 25 मिनट 15 संकेंड भाषण दिया। सुबह 10.45 बजे वह आवास विकास जनसभा स्थल पर

पहुंचे। यहां महर्षि कश्यप, गुहाराज निषादराज व भारत माता के चित्रों के सामने दीप प्रज्ज्वलन किया। सिखलाई बैंड ने जन गण मन व देशभक्ति की धुनें बजाईं। राज्यपाल ने सांसद मुकेश राजपूत की विकास निधि योजना से प्रस्तावित दो करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि सांसद व विधायक निधि में कमीशन के आरोप लगते हैं।  निधि का
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सही प्रयोग किया जाए। सांसद मुकेश राजपूत की मांग पर उन्होंने कासगंज-अलीगढ़ रेलवे लाइन के साथ ही आलू, लहसुन, मक्का उद्योग के लिए केंद्र व राज्य सरकार के लिए अलग-अलग प्रस्ताव मांगे। इससे पहले मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल रामनाईक सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित दिखाई दिए। पेपर लीक होने को गलत बताया। साथ ही

शिक्षा व्यवस्था में फैले अव्यवस्था के कैंसर की कीमोथेरेपी की बात कही। वह 24 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं। नकल रोकने पर दो कुलपतियों को धमकी मिली थी। नकल नहीं होने दी गई। जनसभा में सांसद मुकेश राजपूत ने राज्यपाल को

किसानों का दर्द बताया । उन्होंने कहा कि बरसात व ओलावृष्टि से फसल तबाह हो गई है। जिले को दैवीय आपदा ग्रस्त में शामिल नहीं किया गया। पड़ोसी जिलों को शामिल कर लिया गया। जिले में अब तक 8 किसानों की मौत हो चुकी है। सूखा में भी किसानों को कोई मदद नहीं मिली। समारोह का  संचालन दीपिका त्रिपाठी ने किया।

शहीद की विधवा ने किया हंगामा
राज्यपाल राम नाईक के कार्यक्रम के दौरान शहीद लांस दफे दार मलेटरी सिंह की विधवा व इनके बेटों ने पेट्रोल पंप की मांग को लेकर हंगामा किया। इन्होंने मलेटरी सिंह को मिले सेना मेडल व प्रशस्ति पत्र लहराए। इन्हें सुरक्षाकर्मियों ने राज्यपाल से मिलने नहीं दिया। हालांकि बाद में मुलाकात कराई गई।

शहर से सटे गांव नरायनपुर निवासी मलेटरी सिंह 26 दिसंबर 1984 को आरबीसी कैंट मेरठ में भर्ती हुए थे। 13 फरवरी 1999 को आपरेशन रक्षक के दौरान यह शहीद हो गए। शहादत के लिए उनको सेना मेडल दिया गया था। उनकी पत्नी गीता देवी ने बताया कि पेट्रोल पंप देने का भी वादा भी किया गया था। 15 सालों से वह भटक रही हैं। रिकार्ड आफिस मेरठ,

पेट्रोलियम मंत्रालय भारत सरकार, ईएस सूर्या वेलफेयर कमांड लखनऊ को भी प्रार्थना पत्र दिया। हुआ कुछ नहीं। इस पर वह राज्यपाल से फरियाद लगाने पहुंची। सुरक्षाकर्मियों के न मिलने देने पर हंगामा किया। बाद में राज्यपाल के गीता देवी कोबुलाया और  कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

मेजर सहित कई दिग्गजों को नहीं मिला मंच
राज्यपाल राम नाईक के कार्यक्रम के दौरान भाजपा का अंतर कलह भी खुलकर सामने आया। पार्टी  के तमाम नेताओं को मंच पर जगह नहीं मिली तो कम भीड़ होने के बाद भी भाजपा के तमाम नेता दर्शक दीर्घा में नजर नहीं आएं।  शहर में कार्यक्रम आयोजित होने के बाद भी मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को मंच पर स्थान नहीं मिला। इतना ही नहीं सुरक्षाकर्मियों ने

तमाम भाजपाइयों को धकियां दिया। इस पर भाजपाई एकजुट होकर विरोध करने के बजाय आपस में ही एक-दूसरे पर टिप्पणी करते नजर आए। समारोह स्थल से लेकर होटल तक भाजपाइयों एवं सुरक्षाकर्मियों के बीच नोंकझोंक होती रही।
राज्यपाल के अलावा मंच पर संासद मुकेश राजपूत, भाजपा जिला अध्यक्ष दिनेश कटियार, पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार

व सत्यपाल सिंह के बैठने के लिए स्थान तय था। महामंत्री विमल कटियार मंच पर बने रहे। मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी, मिथलेश अग्रवाल भूदेव राजपूत, राजीव कुमार सिंह, सुंदर लाल कश्यप, संजीव गुप्ता, बाबूराम वर्मा, प्रदीप गुप्ता, सुशील शाक्य को मंच पर बुके देने के लिए बुलाया गया। इसके बाद यह लोग मंच से चले गए। अलीगंज विधानसभा के नेता सत्यपाल को नाम बुलाने से पहले मंच पर आने से बैरंग कर दिया गया। व्यवसायी मनोज गंगवार ने भी राज्यपाल को बुके

दिया। प्रांशुदत्त द्विवेदी का नाम भी स्वागत के लिए बुलाया गया लेकिन वह नहीं पहुंचे। राज्यपाल की क्रिश्चियन इंटर कालेज मैदान पर अगवानी करने की ख्वाहिश भी सभी नेताओं की पूरी नहीं हो पाई। मैदान पर एसपी विजय यादव, एडीएम मनोज सिंघल, संसाद मुकेश राजपूत, विजय गुप्ता, भाष्कर दत्त द्विवेदी, ज्ञानेश गौड, ममता सक्सेना, चित्रा अग्निहोत्री ने स्वागत किया। जनसभा के बाद राज्यपाल ने आवास विकास कालोनी के डायमंड गेस्ट हाउस में लंच किया। यहां भी

सुरक्षाकर्मियों ने पहले से तय सूची में नामों के अलावा भाजपा नेताओं को अंदर नहीं जाने दिया। कई नेताओं को सुरक्षाकर्मियों ने धकि या दिया। इसको लेकर भाजपा नेताओं की सुरक्षाकर्मियों से तनातनी भी हुई। पूर्व ब्लाक प्रमुख भाष्कर दत्त द्विवेदी की भी सुरक्षाकर्मियों से नोकझोंक हुई। जनसभा स्थल पर राघवदत्त मिश्रा, संजय गर्ग, दिवाकरनंद दुबे, दिलीप

भारद्वाज, रामवीर  उपाध्याय, प्रभात अवस्थी, शैलेंद्र सिंह राठौर, अजीत पांडेय, अजीत महाजन, हिमांशु गुप्ता, शशांक शेखर, संदेश राजपूत, रीतेश राजपूत, दीना राजपूत आदि मौजूद रहे।
   
मुन्नूबाबू और डा. रजनी नहीं आईं
राज्यपाल रामनाईक से मुलाकात करने के लिए  गेस्ट हाउस में जाने के लिए 18 लोगों की सूची तैयार की गई थी। बाकि लोग तो यहां पहुंचे, लेकिन पूर्व सांसद चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू और  डा. रजनी सरीन गेस्ट हाउस नहीं पहुंचीं। प्रांशुदत्त द्विवेदी  काफी समय बाद पहुंचे।

कड़ी धूप में चंद लोगों की मौजूदगी में निपटा कार्यक्रम
आवास विकास मैदान में आयोजित कार्यक्रम अपनी रंगत नहीं दिखा सका। रात में हुई बरसात व तेज हवाओं से जनसभा मैदान का पंडाल उड़ गया था। पब्लिक पंडाल के साथ ही मुख्य पंडाल भी गिर गया। कुर्सियां मैदान में इधर उधर बिखर गई। अंतिम समय तक पब्लिक पंडाल सही नहीं हो पाया। हालांकि कार्यक्रम में चंद लोग ही जुटे। फिर भी जो आया, उसे

कड़क धूप में ही राज्यपाल का भाषण सुनना पड़ा। सामने भीड़ कम देख राज्यपाल ने भी कई बार आयोजकों पर निशाना साधा। यहां तक कहा कि शायद धूप की वजह से लोग नहीं पहुंचे होंगे। राज्यपाल की यह टिप्पणी सुन नीचे बैठे लोग हंसने लगे तो मंच पर बैठे नेता बगले झांकते नजर आए।

पालिका कर तो सब कुछ सकती, बस करती नहीं
शहर के लिए शुक्रवार का दिन इतना ही खास था कि राज्यपाल शहर में आ रहे थे। हाकिमों के डर से आम दिनों में सफाई के नाम पर कामचोरी करने वाले सफाई कर्मचारी सड़क किनारे जगह-जगह जमा पानी भी झाडू से निकालते देखे गए। लोग हैरत में थे। इनका कहना था कि पालिका चाहे तो रोज ऐसी ही सफाई हो जाए लेकिन अधिकारियों को आम आदमी की फिक्र ही नहीं है।

राज्यपाल रामनाईक के आने से पहले पालिका ने सफाई कर्मचारियों की फौज झाडू लेकर सड़क पर उतार दी थी। क्रिश्चियन कालेज से आवास तिराहा तक यह सड़क को चमकाते रहे। अधिकारी इनकी निगरानी में रहे। सड़क पर कूड़ा का एक भी तिनका भी इनकी नजर से नहीं बचा। सड़क के किनारे भरे पानी को इन्होंने झाडू़ से साफ  किया। सड़क के किनारे दोनों

ओर चूना भी डाला गया। शहरी देवेंद्र दीन, रामकुमार, विवेक, रमाकांत का कहना था कि पालिका चाहे तो रोज ही शहर में ऐसी सफाई हो सकती है लेकिन आम लोगों की पालिका की  फिक्र ही कहां करती है।
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